absurdistan-001फिल्म बड़ी कुशलता से वर्तमान युग की समस्या- पानी की कमी, को जादुई, परीकथा, दंतकथा और सुपरमैन जैसी कथाओं के अंदाज देकर रोचक अंदाज में दर्शक के सम्मुख प्रस्तुत करती है|
यदि भगीरथ की कथा को छोड़ दें, जिसने कथित रूप से गंगा को धरती पर उतारा तब भी फरहाद की कथा ऐसी है जो दुनिया के किसी भी देश में फब जायेगी| ऐसा बहुधा होता है जब प्रेमावस्था में जी रहा व्यक्ति अपने प्रेम के वास्ते, और अपने प्रेमी की मांग और उसके कथन के सम्मान या प्रेमी का प्रेम पाने, या प्रेमी की नजदीकी पाने के वास्ते महान कार्य सम्पन्न कर जाता है| उसे समझ आ जाता है कि प्रेमी के साथ बिना और उसके प्रेम बिना सब बेमानी है और उसे प्रेम के बिना अपना अस्तित्व बचाए रखना असंभव लगने लगता है|

यदि प्रेमी इस विचार के साथ गहरे में जुड़ गये हैं कि वे एक दूसरे के लिए ही अस्तित्व में आए हैं और अलग रहना उन्हें कष्टदायक लगता है पर स्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि उन्हें कुछ समय के लिए क दूसरे से अलग दूर दूर रहना पड़ जाता है| वे इस दूरी को इस नाते सहन करते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि यह अस्थायी अलगाव अमुक समयावधि के बाद समाप्त हो जायेगा और उनका मिलन फिर से हो जायेगा| लेकिन जब अलगाव के अवधि समाप्त होने के बाद प्रेमी अपने मूल स्थान पर प्रेमिका से मिलने की खुशी से लबरेज होकर लौटता है तो पाता है अब कुछ नई परिस्थितियाँ उत्पन्न हो गई हैं और जब वह प्रेमिका से मिलने, उसे पाने, उसके प्रेम को पाने का प्रयास करता है तो उसके ये प्रयास आदर्शवादी प्रेमिका को खुदगर्जी से भरे हुए लगते हैं और वह उसे लताडती है और उसके सामने गाँव के सभे एलोगों के भले के लिए कुछ कर दिखाने की चुनौती देती है जिससे गाँव उजड़े नहीं और वहाँ जीवन बसा रहे

और इस कार्य को साधने के लिए उसके समक्ष एक बेहद कठिन काम है और यह सब करने के लिए उसके पास सिर्फ पांच दिन का समय है|

Absurdistan एक ऐसी जगह है, जिस पर कोई देश अधिकार नहीं जताना चाहता| सभी देश इसे नजरअंदाज कर चुके हैं|

यहाँ रहने वाले पुरुष, हद दर्जे के आलसी हैं और सारा काम यहाँ की स्त्रियाँ करती हैं और जीवन यापन के साधन जुटाती हैं| पुरुष साधारणतया मंडली में समय व्यतीत करते हैं, पब में शराब पीते हैं और घर लौट कर अपनी अपनी पत्नियों से शारीरिक संबंध कायम करके सो जाते हैं| ज्यादातर इतने कामुक हैं कि शारीरिक क्षुधा शांत करने के लिए वे अपनी स्त्रियों पर उनके कार्यस्थल पर भी धावा बोल देते हैं|

काम करने में पुरुषों की रूचि नहीं लेकिन तब भी वे एक पितृसत्तात्मक व्यवस्था कायम रखना चाहते हैं जहां अंतिम निर्णय करने के अधिकार उनके पास हों और स्त्रियाँ उनके आदेश का पालन करें|

ऐसे स्थल पर एक अस्पताल में एक कमरे में एक ही समय, आसपास के बिस्तर पर एक लड़के और एक लड़की का जन्म होता है| बचपन से ही अपने जीवन का हर पल वे साथ रहकर व्यतीत करते हैं और बड़े होते हैं| एक दूसरे से अलग जीवन की कल्पना भी कभी उनके दिमाग से होकर नहीं गुजरी| कहने को वे दो अलग अलग इंसान हैं पर आत्मिक रूप से वे संयुक्त अस्तित्व हैं|

बड़े होने पर उनके जीवन में वही सब शारीरिक और मानसिक इच्छाएं जाग्रत होती हैं जिनसे उनकी उम्र के अन्य युवा गुजरते हैं| लेकिन अन्य युवाओं की भांति उनके लिए मिलन का रास्ता इतना सरल नहीं है| उनके मिलन के लिए एक खास वक्त मुक़र्रर है| और जब बहुत अरसा इतंजार करने के बाद उनके मिलन के लिए उपयुक्त वक्त आता है तब तक परिस्थितिवश उनका गाँव पानी की गंभीर समस्या से घिर चुका है और वहाँ पानी पहुंचाने वाला एकमात्र स्रोत लगभग सूख चुका है और कभी-कभार बूँद बूँद टपकते हुए पानी के दर्शन थोड़ी देर के लिए हो जाते हैं| गाँव के लोग इस बारे में कुछ कर पाने में असमर्थ हैं और जहां पुरुष अपने को नई परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में लग जाते हैं स्त्रियाँ इस स्थिति को स्वीकार नहीं कर सकतीं| उन्हें तो घर चलाने हैं और भांति भांति के काम निबटाने हैं और इतने कम पानी से उनका काम नहीं चल सकता| पुरुष ऐसी विकट स्थिति में भी मनोरंजन में व्यस्त रहते हैं और चाहते हैं कि पहले की तरह उनका जीवन खाने, पीने, खेलने और सैक्स करने में व्यतीत होता रहे| वहाँ स्त्रियों और पुरुषों के बीच पानी को लेकर गंभीर मतभेद उत्पन्न हो जाते हैं|

ऐसे समाज में जहां महिलायें ही सारे काम करती हैं और पुरुष अनर्गल गतिविधियों में व्यस्त रहते हैं, स्त्रियाँ ही निर्णय लेने का अधिकार भी अपने पास रखती हैं और जीवन को नियंत्रित करने का प्रयास करती हैं|

चिपको’ जैसा आंदोलन भी देखा गया है जहां नारी शक्ति ने आगे बढ़कर पहल करके समाज को दिशा दी है| स्त्री में शक्ति है कि वे सामाजिक बुराइयों का सक्रिय विरोध कर सकें, फिर चाहे वह शराब या नशे का मामला हो, लाटरी का हो या दहेज का, अगर महिला शक्ति ठान ले तो इन बुराइयों को दूर कर सकती है| समाज को उनकी सामूहिक शक्ति के समक्ष झुकना ही होता है क्योंकि वे बुराई को समाप्त करने, अपने परिवार को बचाने और समाज को सुधारने के लिए आगे आती हैं|

इसी नाते कहा भी जाता है कि अगर एक स्त्री को जाग्रत कर दिया जाए तो पूरा घर जाग्रत हो जाता है|

इस गाँव में स्त्रियाँ भी पानी की विकट समस्या के कारण तो परेशान हैं हीँ साथ ही साथ पुरुषों की अकर्मण्यता के कारण भी परेशान हैं| ऐसे में नायिका उन्हें रास्ता दिखाती है जब वह अपने पति बन गये प्रेमी के समक्ष गाँव में पानी लाने की चुनौती देती है और कहती है कि उनका विवाह तभी फलीभूत हो पायेगा और वह तभी उसके नजदीक आ पायेगा और उसे स्पर्श कर पायेगा जब वह गाँव में पानी ला पाने में सफल हो जायेगा और विधि के विधान के अनुसार उनकी शादी के बाद उनके शारीरिक मिलन में केवल पांच दिन का समय बाकी है और इन पांच दिनों में अगर वह पानी नहीं ला पाया तो प्रेमिका को नहीं पा पायेगा

युवक एक सच्चा प्रेमी है, बुद्धिमान है, परिश्रमी है पर क्या वह इस कठिन परीक्षा में सफल हो पायेगा?

पानी की कमी या अनुपलब्धता समाज में बहुत बड़ी समस्याओं को जन्म दे सकता है| पानी बिना तो कुछ भी नहीं किया जा सकता| Absurdistan हास-परिहास के माध्यम से पानी की महत्ता को दर्शाती है|

गांव की सभी स्त्रियाँ नवयुवती के पथ का अनुसरण करती हैं और पुरुषों को स्पष्ट शब्दों में चेता देती हैं और उनके समक्ष नारा लगाती हैं – ” No Water No Sex “.

स्त्री का अपनी देह पर नियंत्रण और वह भी वैवाहिक संबंध में पुरुष को विचलित कर जाता है| जो पुरुष विवाह पूर्व अपनी प्रेमिका की बहुत सी इच्छाओं का सम्मान करता है क्योंकि प्रेमिका से उसकी नजदीकी बहुत कुछ परिस्थितियों और बहुत कुछ प्रेमिका की इच्छा पर निर्भर करती है परन्तु विवाह के पश्चात पत्नी पर वह अपना पूर्ण नियंत्रण समझने लगता है| इतिहास गवाह है कि जहां आम्रपाली जैसी नगरवधुओं के समक्ष पुरुष नतमस्तक रहे वहीं घर की वधू को उन्होंने अपनी इच्छा की दासी बनाया और समझा|

फिल्म में गाँव के पुरुष बेहद कामुक हैं और अपनी पत्नियों को अपनी दासी समझते हैं परन्तु एक कम उम्र की स्त्री के दिशा निर्देश में सारी स्त्रियाँ पुरुषों को दिखा देती हैं कि अपने जीवन की वे खुद स्वामिनी हैं और उनका बराबर का साथ भी पाने के लिए पुरुषों को उनके कंधे से कंधा मिलाकर काम करना पड़ेगा| सुस्त और आरामतलब पुरुष चिंतित होते हैं, परेशान होते हैं पर परिश्रम करना वे भुला चुके हैं| कठिन काम का बीडा उठाता है कम उम्र की स्त्री का प्रेमी जो प्रेम के वशीभूत सारे गाँव को पानी मुहैया करवाने के लिए कमर कास लेता है|

Absurdistan एक बेहद रोचक और अच्छी फिल्म है और यह दर्शक को वैसा संतोष देकर समाप्त होती है जैसा उसे बचपन में कोई अच्छी सी परीकथा या कोमिक्स पढ़ने से या किशोरावस्था में एक बेहतर रोमांटिक किताब पढ़ने से और वयस्क होने पर एक अच्छी सी किताब पढ़ने से मिलता रहा| यह फिल्म बहुत सारे तत्व मिलकर एक खूबसूरत सृजन का नतीजा है

Absurdistan, को यदि संक्षेप में कहा जाए तो यह मुल्ला नसरुद्दीन के बेहतरीन चुटकले जैसी है, जो बुद्धिमत्ता, हास्य और व्यंग्य का मिश्रण होता है| फिल्म के चरित्र चुटकले में दिखाए चरित्रों जैसे मूर्ख लगेंगे पर अंत में दर्शक को महसूस होता है हास-परिहास के मध्यम से उसके पास कुछ मामलों में बुद्धिमत्ता का आगमन हुआ है|

यह आश्चर्य का विषय होता है कि अपने देश के अलावा दूर देशों में भी लोग जीते हैं, ऐसे ही दैनिक महत्व की समस्याओं से दो चार होते हैं जैसे हमारे देश के लोग| उनके पास कहने, लिखने और दिखाने के लिए रोचक कहानियां हैं| वहाँ ऐसे निर्देशक हैं जिनके पास इन रोचक कहानियों को दृश्यात्मक बनाने के खूबसूरत अंदाज हैं|

सिनेमा के क्राफ्ट पर उनकी मजबूत पकड़ है| उनके पास कहानी को फिल्म में परिवर्तित करने के लिए हास्य का जबर्दस्त बोध है और वे हर दूसरे दृश्य में दर्शक को हंसाते हंसाते भी बड़ी सीख दे जाते हैं और दर्शक गंभीर समस्याओं से परिचित होते जाते हैं| फिल्म में वॉयस ओवर का उपयोग इतने प्रभावी तरीके से हुआ है कि दर्शक को इसका आभास भी नहीं हो पाता|

फिल्म में मौजूद स्थल फिल्म की कहानी से इस तरह एकाकार हो जाते हैं कि लगता है फिल्म में दिखाई घटनाएं बस यहीं घटी होंगी| और कैमरे का काम इतना खूबसूरत कि फिल्म में खूबसूरत दृश्यों की भरमार है और उनका असर ऐसा लुभावना कि इमेजरी की स्मृतियाँ सालों दर्शक के जेहन में संरक्षित रहेंगी| संवाद तभी आते हैं जब लगता है अब इनके बिना भावों का सम्प्रेषण नहीं हो पायेगा वरना फिल्म में बिना बोले ही चरित्रों से भावों का सम्प्रेषण करवाया गया है|

निर्देशक Veit Helmer ने दर्शनीय और याद रखने लायक फिल्म बनाई है|

…[राकेश]

 

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