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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Review

Drishyam(2015) : लुका छिपी – अहंकारी पुलिस अधिकारी बनाम सिनेमा भक्त चौथी फेल आम आदमी

जिसने ‘दृश्यम’ फिल्म का मूल मलयाली संस्करण (मोहन लाल अभिनीत) और कमल हसन अभिनीत तमिल संस्करण नहीं देखे हैं उनके लिए फिल्म का अजय देवग्न अभिनीत हिंदी संस्करण एक अच्छे थ्रिलर देखने का आनंद प्रस्तुत करता है और मूल मलयाली... Continue Reading →

Masaan (2015) : खिलने से पहले फूलों को खिज़ा खा गई

‘  ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©

Piku (2015) : हाजत हजार नियामत

...[राकेश]

Jai Ho! Democracy : भारत-पाक तनाव की निरर्थकता को उकेरती एक एंटी वार फिल्म

भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →

NH 10 (2015) : जंगल राज में दबंग भेड़ियों के खिलाफ घायल हिरनी की प्रतिहिंसा

“मैडम जी, शहर में जहां बड़े बड़े मॉल खत्म हो जाते हैं न बस डेमोक्रेसी भी वहीं समाप्त हो जाती है”| एक पुलिस इन्स्पेक्टर फिल्म की नायिका मीरा (Anushka Sharma) से कहता है और उसे समझाता है कि पुलिस वाले... Continue Reading →

Jolly LLB (2013) : प्रेमी वकील बाबू vs. कानून के अंधेपन के दलाल

“बाबूजी, पेशाब ज़रा उधर कर लेंगे…यहाँ हमारा परिवार सोता है”, ©…[राकेश]

Janam(1985): महेश भट्ट की शानदार आत्मकथात्मक प्रस्तुती

http://youtu.be/ARnVfHZBAxQ ...[राकेश]

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