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Cine Manthan

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Girish Karnad

Kalyug (1981) : महाभारत के संघर्ष आधुनिक परिवेश में

‘कुलटा’…, बेटा जोर से अपनी माँ को गाली देकर वार करने के लिए उसकी ओर दौडता है| * * * * * * लोगों के लिए कितना आसान होता है पढ़ना, देखना या सुनना कि कुंती कर्ण के पास जाती... Continue Reading →

Swami (1977): प्रेम का धागा पति से टूटे या प्रेमी से?

नरेन्द्र (विक्रम) और मामा जी (उत्पल दत्त) जीवन में मनुष्य की स्वतंत्रता और जीवन दर्शन पर बातें कर रहे हैं। एक विषय पर मामाजी अपनी पुत्री सरीखी भानजी सौदामिनी (शबाना आजमी), जिसे सब मिनी कह कर सम्बोधित करते हैं, को... Continue Reading →

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

किसी भी परिवार के मुखिया की पत्नी उस घर की धुरी बन जाती है। मुखिया, उसकी संताने सभी लोग उस एक महिला के कारण आपस में जुड़ाव महसूस करते हैं। उन लोगों के आपस में एक दूसरे से अलग विचारधारायें... Continue Reading →

Mr Singh Mrs Mehta (2010): Nudity or Nakedness?

विवाहेत्तर संबंधों के कैनवास पर उभरते, बनते, बिगड़ते और फिर से कोई नया आकार लेते चित्रों की गाथा कह सकते हैं निर्देशक प्रवेश भारद्वाज की पहली फिल्म को। कभी सधे हुये ढ़ंग से भरे हुये रंग दिखायी देते हैं इस... Continue Reading →

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