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K.L. Saigal

कुहू कुहू बोले कोयलिया (Suvarna Sundari– 1957) : मधुर रागमाला, नायाब संगीत

हिन्दी फिल्म संगीत में संगीतकारों द्वारा रागमलिका या रागमाला बनाये जाने के उदाहरण बहुत नहीं होंगे। ज्यादातर गीत किसी एक ही राग पर रचे-बुने और गढ़े जाते हैं। एक ही गीत में एकाधिक रागों का प्रयोग हुआ हो ऐसा कम... Continue Reading →

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B.N. Sircar : भारतीय सिनेमा के विकास की बुनियाद के एक सर्जक

कला का क्षेत्र इस बात में एक विशिष्टता रखता है कि विभिन्न क्षेत्रों के व्यक्त्ति कला के क्षेत्र में अपना योगदान दे सकते हैं और अपने साथ वे अपने क्षेत्र की विशेषज्ञता साथ लाते ही हैं। दादा साहेब फाल्के पुरस्कार... Continue Reading →

दुनिया रंग रंगीली बाबा (धरती माता 1938) – के.एल.सहगल की कस्तूरी

पिछली सदी के तीस और चालीस के दशक में समूचा भारत कुंदनलाल सहगल की आवाज़ के मोहपाश में यूँ ही नहीं बंध गया था। के.एल सहगल की संवेदना से भरपूर भावप्रवण गायिकी और गंगोत्री में गंगा के जल जैसा शब्दों... Continue Reading →

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