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#RajinderKrishan

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

पड़ोसन (1968) : किशोर कुमार की हास्य शाला

इंसान के लिए हँसना तो बहुत जरुरी है| यह अच्छे स्वास्थ्य, मानसिक एवं शारीरिक, का द्योतक भी है और हंसने से व्यक्ति का मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य सुधरता भी है| जैसे पौ फट रही हो जंगल में यूँ कोई मुस्कुराए... Continue Reading →

मिले दो बदन : Blackmail 1973

विजय आनंद ने एक निर्देशक के तौर पर अद्भुत गीतों को सिनेमा के परदे पर जन्माया है| विजय आनंद ने शुरू की नौ फ़िल्मों में से एक तीसरी मंजिल को छोड़कर शेष 8 फ़िल्में देव आनंद को नायक बनाकर ही बनाई थीं| तीसरी मंजिल भी निर्माता नासिर हुसैन और निर्देशक विजय... Continue Reading →

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