Hollywood की बगिया में मूलतः एक्शन स्टार Sylvester Stallone को एक कायदे का अभिनेता होने का सम्मान दिलवाने वाली फिल्मों की दो सीरीज में से एक है 5 फिल्मों वाली Rambo सीरीज, इसमें भी पहली फ़िल्म First Blood का एक अलग ही महत्त्व है|

युद्ध सैनिक और उसके परिवार के लोगों के लिए सामान्य घटना नहीं होती| युद्धस्थल पर देश और इसकी विचारधारा और शान की रक्षा के लिए तात्कालिक रूप से दुश्मन सैनिकों को मरना और बाद में शान्ति काल में युद्ध की यादों की विभीषिका को झेलना, दो अलग अलग और कई मर्तबा विपरीत ध्रुवों की बात बन जाती हैं| कुछ युद्धों में सामन्य नागरिक भी मारे जाते हैं और ऐसी घटनाएं सैनिकों को भी ऋणात्मक तरीके से प्रभावित करती हैं|

पिछली सदी के साठ के दशक में अमेरिका द्वारा वियेतनाम पर आक्रमण की घटना ने सारी दुनिया को अलग अलग स्तर पर विचलित किया| जॉन रेम्बो अमेरिकी सेना का एक सामान्य सैनिक नहीं है बल्कि वह एक स्पेशल टुकड़ी का सदस्य था जिसे मानवीय क्षमताओं की अंतिम हदों पर रख कर स्पेशल ट्रेनिंग दी गई थी| मानव जितना दर्द सह सकता है उससे कहीं ज्यादा दर्द के बीच रहकर उसने ट्रेनिंग ली है अतः उसे महामानव की संज्ञा देना अनुचित नहीं है|

उसकी शान में इतना कहना ही पर्याप्त है कि फ़िल्म में जब अमेरिकन पुलिस का एक अधिकारी सेना के अधिकारी से कहता है,

“तो आप रैम्बो को बचाने आये हैं हम लोगों से“|

सैन्य अधिकारी –

“नहीं, मैं तुम लोगों को रैम्बो से बचाने आया हूँ| तुम रैम्बो को नहीं जानते| वह विशेष रूप से ट्रेनिंग प्राप्त सैनिक है, वह किसी भी परिस्थिति में जीवित रह सकता है, मौसम की कैसी भी परिस्थिति उसे विचलित नहीं कर सकती, वह हफ़्तों भूखा रह सकता है, वह कुछ भी ऐसा खाकर जीवित रह सकता है जिसे देखकर हेई सामान्य आदमी को उल्टी आ जाए| हथियार के साठ वह बहुत खतरनाक है और बिना हथियार के केवल हाथों के साथ भी वह उतना ही खतरनाक है|“

फ़िल्म – रैम्बो मूलतः एक अकेले पूर्व सैनिक की एक शहर की पूरी पुलिस फ़ोर्स के साथ संघर्ष की गाथा है| यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जो ऊपर से गहरी झील सा शांत है लेकिन अन्दर से वह ज्वालामुखी है जिसे छेड़ने की जुर्रत नहीं करने एचाहैये क्योंकि अगर उसके अन्दर विस्फ़ोट हो जाए तो बाहर जो पिघलता हुआ क्रोध रुपया लावा बहेगा वह अपनी पहुँच में आने वाली हरेक वास्तु को नष्ट कर देगा|

रैम्बो अपनी बेहतरीन सिनेमेटोग्राफी के लिए भी विशिष्ट फ़िल्म है, और बैक ग्राउंड म्यूजिक के लिए भी, मेक अप के लिए भी, एक्शन दृश्यों के लिए भी और एक्शन और शान्ति के दृश्यों के मिश्रित संयोजन और प्रबंधन के लिए भी|

एक छोटे शहर की सीमा पर बाहर निकलने वाले एक पुल पर एक अकेला आदमी कंधे पर पिट्ठू लिए चला जा रहा है, दूर दूर तक कोई नहीं हैं, शहर के शैरिफ की कार वहां से गुज़रती है, शैरिफ अपने शहर में एक अनजान व्यक्ति को देखकर उसमें रूचि लेता है, उसे शहर के बाहर छोड़ कर आता है, मुड़ कर कार को कुछ दूर लेकर जाता है और पाता है कि अजनबी दुबारा उसके शहर की ओर पैदल चल पड़ा है|

शहर के सबसे बड़े अधिकारी का अहं कितना बड़ा होगा? बस इसी अहं के नशे में वह अपने जीवन की सबसे बड़ी भूल कर बैठता है, उस अजनबी को मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना देकर और अजनबी का इस प्रताड़ना के विरोध में प्रतिक्रियात्मक गुस्सा अधिकारी और उसके सारे तंत्र पर कहर बन कर गिरता है|

शहर के बाहर पहाड़ों और जंगल में रैम्बो और पुलिस के बीच की आँख मिचौली दर्शक को ऐसे रोमांच से भर देती है कि हिंसा में भी आकर्षण हो सकता है इसके दर्शन कराती है| एक सैनिक कैसे प्रकृति का सहारा लेकर अपने को छिपाता है (camouflage) वह इस फ़िल्म की बहुत बड़ी खासियत है| दर्शक तक को भी आभास् नहीं होता बस उसे आशंका जरुर रहती है कि यहाँ रैम्बो प्रकट होगा और वह बिलकुल अनपेक्षित जगह से बिलकुल भी सोचे न जा सकने वाले अंदाज़ में उसे खोज कर मार डालने के उद्देश्य में लगी पुलिस के लोगों पर अपने युद्ध कौशल के नमूने दिखाता रहता है|

एक्शन किस रोमांचकारी अंदाज़ का है इसका एक नमूना है कि हेलिकॉप्टर की सहायता से रैम्बो को जंगल और पहाड़ में खोजा जा रहा है, और कैमरा जब रैम्बो , जहां है, वहां ज़ूम करके पहुंचता है तो दर्शक ऐसे ही चिहुंक सकता है जैसा किसी रोमांचकारी मैच देखते समय उसका पसंदीदा खिलाड़ी कुछ विशेष कर दे और खेल देख रहे दर्शक रोमांच से भर कर अपनी सीटों से उछल पड़ें| यह एक दृश्य ही सिनेमाघरों में इसे पहली बार देख रहे दर्शकों के टिकट के पैसे वसूल करवा चुका होगा|

युद्ध की विभीषिका झेल रहे सैनिक, जिसका कोई परिवार नहीं है, को समाज अगर विशेष तरीके से संभालेगा नहीं तो कितना भयानक जीवन हो सकता है उस सैनिक के लिए और उसके कारण उसके इर्द गिर्द, इसे देखने के लिए रैम्बो सीरीज की इस पहली फ़िल्म को देखना अत्यंत आवश्यक है और एक एक्शन फ़िल्म के तौर पर तो यह अव्वल दर्जे की फ़िल्म है ही|

रैम्बो देखकर यह भी ज्ञात होता है कि शुरू में अगर पुल पर रैम्बो से टकराते शैरिफ को कोई यह सलाह देता कि – आग से खेला नहीं करते, और वह इसे मान भी लेता तो इस छोटे से शहर में उसका एकछत्र राज इस तरह तिनका तिनका न बिखरता|

                    ….[राकेश] 

 

 


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