हिन्दी सिनेमा ने शरतचंद्र चटर्जी, टैगोर, बिमल मित्र, समरेश बसु, आदि बंगलाभाषी साहित्यकारों की रचनाओं पर आधारित फ़िल्में बनाई हैं और इन पुस्तकों के कारण ठोस विषय सामग्री मिल जाने के कारण इन सभी फिल्मों का स्तर सराहनीय रहा है| लेकिन हिन्दी सिनेमा ने हिन्दी साहित्य की तरफ दृष्टि कम ही डाली है| कभी-कभार प्रेमचंद की कुछ किताबों को हिन्दी सिनेमा और उससे ज्यादा टीवी पर जगह मिल गई| कभी साहित्य के अच्छे पारखी बासु चटर्जी ने प्रयास किये तो लेखक राजेन्द्र यादव के उपन्यास “सारा आकाश” पर उसी नाम से फ़िल्म बना दी और मन्नू भंडारी की कहानी पर “रजनीगंधा” फ़िल्म बना दी| लेकिन सही अर्थों में हिन्दी साहित्य को हिन्दी सिनेमा ने जगह न के बराबर दी है|

अस्सी के दशक में सनी देओल को फ़िल्म – बेताब. से फिल्मों में प्रवेश कराते उनके पिता धर्मेन्द्र ने कहा था कि न्यूकमर्स के लिए तो लव स्टोरी ही बेहतर रहती है| हिन्दी सिनेमा में नवोदित अभिनेताओं के लिए ही नहीं बल्कि अनुभवी अभिनेताओं के लिए भी प्रेम कथाएं खोजी जाती हैं लेकिन इस खोज में वे बिरला ही हिन्दी साहित्य के दरवाजे पर पहुँचते हैं जबकि हिन्दी साहित्य में ऐसी बेहतरीन पेम कहानियां भरी पडी हैं जिन पर उच्च स्तरीय फ़िल्में बनाई जा सकती हैं|

धर्मवीर भारती का उपन्यास – गुनाहों का देवता और हिमांशु जोशी का उपन्यास – तुम्हारे लिएशरत चंद्र चटर्जी के उपन्यास – देवदास की भांति भावुकता की चाशनी में पगे हुए उपन्यास हैं, और जो अपने रचे जाने के साल से लेकर वर्तमान तक पाठकों को निरंतर लुभाते रहे हैं| (अति) भावुकता के आरोपों से घिरे इन उपन्यासों को लोग पढते हैं और इनसे जुड़ाव महसूस करते हैं| इन उपन्यासों में कुछ ऐसा अवश्य है कि इनकी तमाम कमियों को जानते हुए भी इन्हें पढ़ चुके लोगों का इनसे पूरी तरह छुटकारा कभी नहीं हो पाता| शरत चन्द्र के देवदास पर भारतीय सिनेमा ने बार बार अपना हाथ आजमाया है|

ये उपन्यास गुलशन नंदा और अन्य लेखकों दवारा लिखे जाने वाले कोरी भावुकता की बुनियाद पर रचे जाने वाले सामाजिक उपन्यास नहीं हैं बल्कि ये अच्छे साहित्य के किले में पाठक को प्रवेश दिलवाने वाले द्वार हैं जिनसे नये और पुराने और अनुभवी पाठक साहित्य में प्रवेश करते ही रहते हैं| जब गुलशन नंदा के उपन्यासों पर हिन्दी सिनेमा ने रोचक फ़िल्में बनाई हैं तो गुनाहों का देवता और तुम्हारे लिए सरीखे उपन्यास तो उनसे बहुत ऊपर की सामग्री प्रस्तुत करते हैं|

तुम्हारे लिए” पर दिल्ली दूरदर्शन ने नब्बे के दशक में एक धारवाहिक का निर्माण किया था लेकिन इसमें एक फ़ीचर फ़िल्म बनाए जाने के सभी गुण उपस्थित हैं|

…[राकेश]


Discover more from Cine Manthan

Subscribe to get the latest posts sent to your email.