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Bawarchi (1972): दिल चोर बावर्ची!

सन 1972 से पहले ही भारत में हिंदी फिल्म उधोग के सुपर स्टार के रूप में राजेश खन्ना की अनूठी सफलता की चमक हिंदी सिनेमा के संसार को चुंधियाने लगी थी| आराधना के बाद राजेश खन्ना की लगभग हर फिल्म... Continue Reading →

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Khushboo (1975) : रिश्ते में प्रेम, त्याग, इंतजार, दुख और अधिकार की मिली-जुली खुशबू

शरत चंद्र चटर्जी की कहानी पर आधारित खुशबू, एक पीरियड फिल्म है और फिल्म देखते हुए इस बात को ध्यान में रखना जरुरी है क्योंकि आधुनिक दौर की परिभाषाएँ ऐसी फिल्मों पर लागू नहीं होतीं और हो नहीं सकतीं क्योंकि... Continue Reading →

Dus Tola (2010) : गुलज़ार की सोने की खान से कुछ स्वर्ण-मुद्राएं

दस तोला फिल्म की ज्यादा चर्चा नहीं हुयी पर गुलज़ार साब द्वारा इस सीधी सादी कहानी वाली रोचक फिल्म के लिये ऊँचे स्तर वाले लिखे गये गीत भरपूर ध्यान माँगते हैं। संदेश शांडिल्य ने आकर्षक धुनों से गीतों को ध्वनियाँ... Continue Reading →

दो नैनों में (Khushboo 1975) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक के संगम का जादू

यूँ तो खुशबू के सभी गीत एक से बढ़कर एक हैं पर फिल्म की परिस्थितियों के अनुरुप – दो नैनों में आँसू भरे हैं, गीत तो कमाल का बन पड़ा है। यह कहना अतिशयोक्त्ति न होगी कि यह गीत गुलज़ार... Continue Reading →

Abhimaan (1973) : अमिताभ- जया श्रेष्ठ हैं या कला और प्रतिभा?

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और सुबीर की शादी के स्वागत समारोह के बाद यह उमा और चित्रा की दूसरी ही... Continue Reading →

Achanak (1973) : गुलज़ार का थ्रिलर लैंड

गुलज़ार साब की अपनी बनायी फिल्मों में "लेकिन" और "अचानक" दो ही थ्रिलर हैं। अचानक में गुलज़ार समाज में साधारणतया बसने वाली बेवफाई, कत्ल, नैतिकता और मौत की सजा आदि की परिभाषाओं को खंगालते हैं। "सैंकड़ों को वहाँ जंग में... Continue Reading →

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