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Cine Manthan

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Ghalib

सभी सुख दूर से गुज़रे (Aarambh 1976) : दुःख ही जब जीवन का स्थायी भाव बन जाए

कोविड संक्रमण के काल में जब लोग अपने प्रियजनों को खोते या बेहद कष्ट झेलते देखते जा रहे हैं तब इस गीत के दुःख के भाव का मुकाबला कम ही गीत कर सकते हैं| https://www.youtube.com/watch?v=GCIfOieDiHU https://youtu.be/-aLz0LWE-Jg?si=qO3JIdKnxhKaRLyR https://youtu.be/VQyheTapPkE?si=r0YQdFw2-iDKF1kc (Text) © CineManthan & Rakesh

Masaan (2015) : खिलने से पहले फूलों को खिज़ा खा गई

‘  ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©

Jai Ho! Democracy : भारत-पाक तनाव की निरर्थकता को उकेरती एक एंटी वार फिल्म

भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी, बचपन और वो जगजीत सिंह: कौन भूला है यहाँ कोई न भूलेगा यहाँ

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलते हैं (बशीर बद्र) मैं रोया परदेश में भीगा माँ का प्यार, दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार निदा फाज़ली के ही दोहे... Continue Reading →

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