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Tere Ghar Ke Samne (1963) : सर्दियों की नर्म धूप

अगर ‘तेरे घर के सामने’ को हिंदी सिनेमा की सर्वश्रेष्ठ रोमांटिक कॉमेडी ड्रामाटिक फिल्म न भी माना जाए तो इस श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ पांच फिल्मों में इसे शुमार किया जाना किसी भी तरह के संदेह से परे हैं| ‘तेरे घर... Continue Reading →

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कहीं बेख्याल होकर यूँ ही छू लिया किसी ने (Teen Deviyan 1965)

ऐसा कोई भारतीय संगीत प्रेमी ढ़ूँढ़े से न मिल पायेगा जो देव आनंद अभिनीत तीन देवियाँ फिल्म के, मो. रफी की नाजुक और मखमली गायिकी से सजे इस गीत को सुने और इसे पसंद न करे। इस गीत को पहली... Continue Reading →

लिखा है तेरी आँखों में (Teen Deviyan 1965) : किशोर कुमार के अद्भुत दौर की शुरुआत

इस गीत से किशोर कुमार हिन्दी फिल्मों में गायन की अपनी दूसरी एवं आधुनिक पारी के श्रीगणेश का शंखनाद करते हैं| हालांकि किशोर कुमार की गायिकी के आधुनिक काल में प्रवेश की झलक Mr. X in Bombay (1964) के गीत... Continue Reading →

Teen Deviyan (1965) : जब कुछ नहीं तो ये इशारे क्यों

टैगोर ने कभी लिखा था - A Lad there is and I am that poor groom That is fallen in love knows not with whom यह किशोरावस्था से युवावस्था की दहलीज पर खड़े युवाओं में से कुछ की मनोस्थिति को... Continue Reading →

तू कहाँ ये बता इस नशीली रात में [तेरे घर के सामने(1963)]: एक नशीला रोमांटिक गीत

विजय आनंद द्वारा निर्देशित फिल्म- तेरे घर के सामने, के नायक- राकेश (देव आनंद) और नायिका- सुलेखा (नूतन) द्वारा आपस में प्रेम में होने की आपसी समझ विकसित होने के बाद परस्पर प्रेम के शुरुआती दौर में जब नायिका अपनी... Continue Reading →

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