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Vanraj Bhatia

Mammo (1994) : भारत के बंटवारे और ‘दो राष्ट्र’ के जिद्दी प्रयोग में दबी कुचली ज़िंदगी

मम्मो अकेली इंसान नहीं थी जिसकी ज़िंदगी मुहम्मद अली जिन्ना के पाकिस्तान बनाने के कारण पटरी से उतर गई, उस जैसे लाखों लोग 1947 के बाद दो राष्ट्र के सनकी प्रयोग के कारण टूटी फूटी ज़िंदगी जीने के लिए विवश... Continue Reading →

Kalyug (1981) : महाभारत के संघर्ष आधुनिक परिवेश में

‘कुलटा’…, बेटा जोर से अपनी माँ को गाली देकर वार करने के लिए उसकी ओर दौडता है| * * * * * * लोगों के लिए कितना आसान होता है पढ़ना, देखना या सुनना कि कुंती कर्ण के पास जाती... Continue Reading →

नसीम(1995): अनेकता में एकता की विरासत पर हमले की दास्तान

सईद मिर्जा की फिल्म नसीम कई मायनों में एक महत्वपूर्ण फिल्म है। यह समकालीन समस्यायों पर अपना ध्यान केंद्रित करने से नहीं हिचकिचाती। यह फिल्म एक खास माहौल में जन्मे घटनाचक्रों को अपने कथानक में समेटती हुयी आगे बढ़ती है... Continue Reading →

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