





स्त्री स्वरों में गाये गये गीत पुरुष स्वरों में गाये गीतों से ज्यादा अच्छे हैं। सुनो नंद रानी, ओ री सौतनियाँ, न जाने कहाँ बंसी बजाये घनश्याम, कहाँ छोड़ी मुरली कहाँ छोड़ी राधा, बन नौ रसमय, और मुरली तुम्हारी अजब मुरारी, इस एलबम के बहुत ही अच्छे गीत हैं। “ओ री सौतनियाँ बांसुरी” और “न जाने कहाँ बंसी बजाये घनश्याम” दोनों ही मधुर गीत अपने प्रभाव में श्रेष्ठतम गीतों जैसे हैं।
मुरली मेरे श्याम की– एलबम, भक्ति एलबमों में एक एवरेस्ट सरीखी ऊँचाई रखता है। यह एलबम अदभुत है, बेहद सुरीला और प्रभावी है।
…[राकेश]
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