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Mathura

Mimi (2021) : शिशु के साथ ही नहीं जन्मती माँ…

दुनिया की निगाह में एक युवा स्त्री तभी माँ के रूप में दिखाई देती है जब वह एक नवजात शिशु के साथ एक फ्रेम में साथ दिखाई दे| मानसिक तौर पर जब स्त्री तैयार हो जाती है मातृत्व की ओर... Continue Reading →

मुरली मेरे श्याम की(1985): कान्हा की मधुर बांसुरी का रस्सावादन वाया गुलज़ार एवम रघुनाथ सेठ

स्त्री स्वरों में गाये गये गीत पुरुष स्वरों में गाये गीतों से ज्यादा अच्छे हैं। सुनो नंद रानी, ओ री सौतनियाँ, न जाने कहाँ बंसी बजाये घनश्याम, कहाँ छोड़ी मुरली कहाँ छोड़ी राधा, बन नौ रसमय, और मुरली तुम्हारी अजब... Continue Reading →

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