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vishal bhardwaj

धूप आने दो (2020) : “गुलज़ार एवं ‘विशाल+रेखा’ भारद्वाज” की वैदिक सूर्य स्तुति

‘सूरज की पहली किरण से आशा का सवेरा जागे’ जीनियस किशोर कुमार द्वारा रचित पंक्ति गागर में सागर भरने की उक्ति को चिरतार्थ कर देती है| धरा पर मानव जीवन पर छाए “कोविड-19” के गहरे धुंध भरे साये तले सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक... Continue Reading →

Choked पैसा बोलता है (2020) : Saiyami Kher की लॉटरी

फ़िल्म के अंदर ही सैयामी खेर को पाइप में छिपा धन नहीं मिलता बल्कि यह फ़िल्म उनकी प्रतिभा के प्रस्तुतीकरण के लिए लॉटरी लगने के समान भाग्यशाली प्रतीत होती है| उनकी पहली फ़िल्म मिर्ज़या देख किसने सोचा होगा कि उनकी... Continue Reading →

इरफ़ान (1966-2020) : चकाचौंध मचाता सितारा डूब गया गुलशन सारा उदास छोड़ कर

मुद्दतों बाद मयस्सर हुआ माँ का आँचल मुद्दतों बाद हमें नींद सुहानी आई ...[राकेश] © लेख के सन्दर्भ आनंद https://cinemanthan.com/2015/09/25/ananad1971/ कलयुग https://cinemanthan.com/tag/kalyug-1981/ 7 खून माफ़ https://cinemanthan.com/2015/04/21/7khoonmaaf/ तलवार https://cinemanthan.com/2015/10/06/talvar2015/ Piku https://cinemanthan.com/2015/05/12/piku2015/

Talvar (2015) : पुलिस की अक्षम और आपत्तिजनक तहकीकात पर श्वेत पत्र

कुछ साल पहले खोजी पत्रिका ‘तहलका’ की पत्रकार शोमा चौधरी ने आरुषि हत्याकांड में अदालत का निर्णय आने पर अपनी तरफ से खोज की थी और अपने लेख (विस्तृत लेख यहाँ पढ़ा जा सकता है और शोमा दवारा खुलासा किये... Continue Reading →

7 Khoon Maaf (2011) : तत्वविज्ञानी रस्किन बांड+विशाल भारद्वाज की मार्फ़त Susanna का दृष्टांत

ऐसी फिल्में हिन्दी सिनेमा में बनती नहीं है अतः ऐसे प्रयासों का समुचित रुप से सही मूल्यांकन होना चाहिये और केवल बॉक्स ऑफिस की सफलता को ही पैमाना बनाकर ऐसी फिल्मों की संभावनाओं को नष्ट नहीं करना चाहिये। ...[राकेश] ©

दिल तो बच्चा है जी (Ishqiya 2010) : पाजी दिल के करिश्मे

    ऐसी उलझी नज़र उनसे हटती नहीं दाँत से रेशमी डोर कटती नहीं     उम्र कब की बरस कर सफ़ेद हो गयी कारी बदरी जवानी की छँटती नहीं     वल्लाह ये धड़कन बढ़ने लगी है चेहरे की रंगत उड़ने लगी... Continue Reading →

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