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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Cine Manthan

“Cinema is the most beautiful fraud in the world.” (Jean-Luc Godard)

पंडित नेहरु और हिंदी फ़िल्में

पचास और साठ के दशक का हिंदी सिनेमा भी नेहरु के विशाल व्यक्तित्व के प्रभाव से अछूता नहीं रहा और हिंदी फिल्मों के नायकों का चरित्र भारत को लेकर नेहरुवियन दृष्टिकोण से प्रभावित रहा और उसमें चारित्रिक आदर्श की मात्रा डाली जाती... Continue Reading →

पंडित नेहरु : श्रद्धांजलि (अटल बिहारी वाजपेयी)

29 मई 1964, राज्यसभा एक सपना था जो अधूरा रह गया। एक गीत था जो गूँगा हो गया। एक लौ थी, जो अनन्त में विलीन हो गयी। सपना था, एक ऐसे संसार का, जो भय और भूख से रहित होगा।... Continue Reading →

पंडित नेहरु और ओशो

ओशो बुनियादी तौर पर ही राजनीतिज्ञों के खिलाफ थे और सारी उम्र वे उनके खिलाफ बोलते ही रहे। उन्हें निशाना बनाते रहे। उनके ऊपर चुटकले बनाकर लोगों को शासकों की इस जाति के सामने मानव को आँखें मूँद कर समर्पण न... Continue Reading →

विफलता : क़ैदी – जयप्रकाश नारायण

काशी

काशी सध नहीं रहीचलो कबीरा!मगहर साधें सौदा-सुलुफ कर लिया हो तोउठकर अपनीगठरी बांधेइस बस्ती के बाशिंदे हमलेकिन सबके सब अनिवासी,फिर चाहे राजे-रानी हों-या हो कोई दासी,कै दिन की लकड़़ी की हांडी?क्यों कर इसमें खिचड़ी रांधे? राजे बेईमानवजीरा बेपेंदी के लोटे,छाये... Continue Reading →

काफ़िर

मैं भी काफ़िर, तू भी क़ाफ़िरफूलों की खुशबू भी काफ़िरलफ्जों का जादू भी काफ़िरये भी काफिर, वो भी काफिरफ़ैज़ भी और मंटो भी काफ़िरनूरजहां का गाना काफ़िरमैकडोनैल्ड का खाना काफ़िरबर्गर काफ़िर, कोक भी काफ़िरहंसना, बिद्दत, जोक भी काफ़िरतबला काफ़िर, ढोल... Continue Reading →

ओशो द्वारा लिखा 54 साल पुराना पत्र

प्रिय, मौन आशीर्वाद है, लेकिन यह मौन तुम्हारे द्वारा रचा नहीं जा सकता| क्योंकि तुम तो स्वयं में शोर ही हो| इसलिए तुम कैसे मौन रच सकते हो? लेकिन तुम मौन का भ्रम अवश्य ही रच सकते हो| और मौन... Continue Reading →

जंग नहीं : अटल बिहारी वाजपेयी

विश्व शांति के हम साधक हैं,जंग न होने देंगे!कभी न खेतों में फिर खूनी खाद फलेगी,खलिहानों में नहीं मौत की फसल खिलेगी,आसमान फिर कभी न अंगारे उगलेगा,एटम से नागासाकी फिर नहीं जलेगी,युद्धविहीन विश्व का सपना भंग न होने देंगे।जंग न... Continue Reading →

गाए –  इस्माइल मेरठी

इस्माइल मेरठी = मोहम्मद इस्माइल Pic - Cow Painting by Nandlal Bose

दो सत्य – ईश्वर और मृत्यु !

दो सत्य बातें कभी भूलनी नहीं चाहियें अगर तुम मुक्ति के लिए उत्सुक हो एक है मृत्यु और दूसरा है ईश्वर! मृत्यु की सच्चाई : इस संसार में हर वस्तु अपनी मृत्यु की ओर अग्रसर है| जिसका भी आरम्भ है उसका... Continue Reading →

भीगा भीगा मौसम आया

हिंदी सिनेमा में नायक-नायिका की भूमिकाएं निभाने वाले अभिनेताओं की प्रसिद्द जोड़ियों में मिठुन चक्रवर्ती और रंजीता कौर की जोड़ी भी रही है, जिन्होंने अपने फिल्मी जीवन के शुरुआती दौर में बहुत सी फ़िल्में एक साथ कीं| यह कहना भी... Continue Reading →

राजनेतागण : न काहू से दोस्ती न काहू से बैर

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्य तिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, अभिनेता राज बब्बर ने लिखा - [भारत को शुरुआत के 3-4 दशकों में ही 3-4 लड़ाईयां लड़नी पड़ी - आंतरिक उथल... Continue Reading →

भारत में कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग का आगाज़

भारत में कंप्यूटर साइंस की नींव 1950 के दशक में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI), कोलकाता में रखी गई थी, जहाँ 1956 में पहला डिजिटल कंप्यूटर HEC-2M स्थापित किया गया। इसके बाद, TIFRAC (टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च ऑटोमैटिक कैलकुलेटर) 1960... Continue Reading →

लफड़ा सदन – न बन पाने वाली फ़िल्म के लॉन्च की कथा

अपने जीवन में पीछे मुड़कर देखता हूँ तो अवसरों भरे उन कुछ दिनों पर निगाहें ठहरती हैं जो  संयोग, सौहार्द और सिनेमाई उम्मीदों से भरे हुए रहे हैं| जैसे 2 अक्टूबर 1976 का चमकीला दिन! उस दिन बॉम्बे के फ़िल्म... Continue Reading →

नसीम बानो : मंटो की निगाह और लेखनी से

सआदत हसन मंटो ने 'गंजे फ़रिश्ते' शीर्षक से एक किताब लिखी थी जिसमें उनके द्वारा हिंदी सिनेमा में बिठाये वक्त के दौरान संपर्क में आये फ़िल्मी दुनिया के लोगों के बारे में संस्मरण थे| कुछ साल पहले पेंग्विन, इण्डिया ने... Continue Reading →

हिंदी – अबू धाबी में न्यायालय की तीसरी भाषा बन ही गई

यशपाल और कम्यूनिज़्म : ओशो

मेरे एक कम्यूनिस्ट मित्र थे- वे वास्तव में बड़े बौद्धिक थे| उन्होंने बहुत सारी किताबें लिखीं, सौ के आसपास, और सारी की सारी कम्यूनिस्ट थीम से भरी हुई, पर अपरोक्ष रूप से ही, वे उपन्यासों के माध्यम से यह करते... Continue Reading →

रंगीले बाबू : दुःख और वेदना पर अट्ठाहस लगाता मानव

बाबू रसिकलाल को मैं उस वक्त से जानता हूं, जब वे लॉ कॉलेज में पढ़ते थे। मेरे सामने ही वकील हुए और आनन-फानन चमके। देखते-देखते बंगला बन गया, जमीन खरीद ली और शहर के रईसों में शुमार में शुमार होने... Continue Reading →

छैनू, श्याम आ गया है !

छैनू के भरोसे पतुनिया के लोगों ने श्याम के एक डेरे पर आक्रमण कर दिया और मार-काट मचाकर कई पुरुषों की ह्त्या कर, स्त्रियों को धमकी दे गए - श्याम को बता देना कि छैनू आया था, बहुत गर्मी है... Continue Reading →

Operation Sindoor : बाल ठाकरे होते तो !

भारत की अतिलोकप्रिय फ़िल्म "शोले" में गब्बर सिंह द्वारा उनके परिवार पर आतंकी हमले के कुछ अरसा बाद बदले की भावना से पीड़ित व परिजनों के सामूहिक क़त्ल के दुःख से कुंठित ठाकुर बलदेव सिंह अपनी सर्द आवाज़ में कहते... Continue Reading →

Operation Sindoor : भारत की विजय या हार !

ऑपरेशन सिन्दूर : भारत कहाँ जीता कहाँ हारा और जहाँ हारा वहां क्यों हारा ? यह एक महत्वपूर्ण स्थिति है| ----------------भारतीय सेना द्वारा सटीक लक्ष्यभेदी पराक्रम दिखाने के बावजूद भारत कहाँ पिछड़ा?भारत कुछ मायनों में पिछड़ गया यह स्पष्ट ही... Continue Reading →

1965 भारत-पाक युद्ध : FTII, ऋत्विक घटक का इस्तीफ़ा, शत्रुघ्न सिन्हा की खिचड़ी

1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान FTII (तब FII) में बेहद कठिन परिस्थितियों में आपसी संबंध पनपने का दौर: एक संस्मरण (HK Verma) [नोट : यह लेख श्री एच के वर्मा के अंगरेजी में लिखे लेख का हिंदी अनुवाद है| HK Verma,... Continue Reading →

महात्मा गांधी : कायरता और हिंसा के बीच चुनाव!

मैं एक पूरी जाति को नष्ट करने का जोखिम उठाने की अपेक्षा हजार बार हिंसा का जोखिम उठाने को तैयार हूँ। हिंसा ही विकल्प : मैं यह मानता हूं कि जहां कायरता और हिंसा के बीच ही चुनाव करना हो,... Continue Reading →

‘कारगिल’ और भारत-पाक शांति प्रयास

पिछली सदी में नब्बे के दशक के अंत में जब भारत और पाकिस्तान अपने अपने परमाणु अभियानों क्रमश: “शक्ति” और “गौरी” की आँच से तप रहे थे तो ग़ालिब के दो सदी बाद मनाये जाने वाले जयंती समारोह “अंदाज-ए.बयां” की मार्फत मशहूर... Continue Reading →

वतन पर खतरे के समय फ़िल्म उद्योग के कर्त्तव्य

सन 1962 में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरु की वैश्विक शांति में आस्था पर चोट करते हुए उनके पंचशील के सिद्धांत को ठुकराते हुए पड़ोसी चीन ने भारत पर आक्रमण कर दिया| अंगरेजी हुकूमत से आज़ादी मिले डेढ़ दशक... Continue Reading →

अशोक और कलिंग युद्ध

एक ही काल, समय और स्थान पर उपस्थित सभी मानवों के ऊपर एक ही बात का असर एक जैसा नहीं होता| एक ही कृत्य में सम्मिलित सभी कर्मियों का योगदान एक समान नहीं होता, बाहर से भले ही एक जैसा... Continue Reading →

जाने वाले सिपाही से पूछो (उसने कहा था 1960) – गीतकार शैलेन्द्र या मख़दूम?

बिमल रॉय निर्मित और मोनी भट्टाचार्जी निर्देशित फ़िल्म - उसने कहा था, हिंदी के लेखक चन्द्रधर शर्मा 'गुलेरी' की एकमात्र उपलब्ध कहानी - उसने कहा था, पर आधारित है| सलिल चौधरी के मधुर एवं आकर्षक संगीत से सजी इस फ़िल्म... Continue Reading →

भारत में सिनेमा का पहला विज्ञापन!

जब स्वामी विवेकानंद बाद में बेहद प्रसिद्द हो जाने वाली शिकागो की यात्रा हेतु भारत से शिकागो वाया वैंकुवर पहुँच रहे होंगे तब भारत में सिनेमा अपनी पहली मुंह दिखाई कर रहा था| July 1896 के पहले सप्ताह में जब... Continue Reading →

‘एकाक्षर’ और ‘द्वयक्षर’ श्लोक :  अदभुत कल्पनाशक्ति

सारे जहां का दर्द : प्रधानमंत्रियों की विदेश यात्रा

देश के लिए यह सौभाग्य की बात है या दुर्भाग्य की, मगर यह सच है कि भारत के प्रधानमंत्री के पद का दर्जा कुछ महीनों से बहुत तेजी से उठ गया है। जो साधारण सड़कछाप वोटर इस गलतफहमी में थे... Continue Reading →

जयप्रकाश नारायण का पत्र प्रधानमंत्री पंडित नेहरु के नाम

सन 1962 के सितम्बर माह में कॉमनवेल्थ प्रधानमंत्रियों के सम्मलेन (Commonwealth Prime Ministers' Conference, September 10 to 19, 1962) में भाग लेने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु लन्दन गए थे| उससे कुछ दिन पहले जय प्रकाश नारायण... Continue Reading →

पुरस्कार : दुश्मन राष्ट्र के नागरिक से प्रेम

आर्द्रा नक्षत्र आकाश में काले काले बादलों की घूमड़, जिसमें देव-दुंदुभी का गंभीर घोष। प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण पुरुष झांकने लगा था। देखने लगा महाराज की सवारी। शैलमाला के अंचल में समतल उर्वरा भूमि से सोंधी बास... Continue Reading →

1 मई ‘मज़दूर दिवस’ वाली माँ

सभी माताएं महान होती हैं, अपने बच्चों के लिए वे नाना प्रकार के त्याग करती हैं, अपने बच्चों के लिए वे अपने जीवन को, और अपनी अभिलाषाओं को, काट-छांट कर सीमित बना देती हैं| अपने बच्चों के भविष्य को गढ़ने... Continue Reading →

Sylvester Stallone और उनका पालतू कुत्ता

Rocky और Rambo जैसी विश्व विख्यात फिल्मों के सर्जक हॉलीवुड के प्रसिद्द एक्शन स्टार Sylvester Stallone के चेहरे का एक हिस्सा जन्म से ही पैरालीसिस से ग्रस्त था| पर बचपन में  ही उनमें अभिनेता बनने की इच्छा घर कर गई थी और उन्होंने अपने सपने को पूरा... Continue Reading →

अहा आम! वाह आम!

जो आम में है वो लब ए शीरीं में नहीं रसरेशों में हैं जो शेख की दाढ़ी से मुक़द्दसआते हैं नज़र आम, तो जाते हैं बदन कसलंगड़े भी चले जाते हैं, खाने को बनारस होटों में हसीनों के जो, अमरस... Continue Reading →

भगत सिंह की धर्मनिरपेक्षता की विरासत

के सी त्यागी जनसत्ता (23 मार्च 2015)

जिहाद (प्रेमचंद)

बहुत पुरानी बात है। हिंदुओं का एक काफिला अपने धर्म की रक्षा के लिए पश्चिमोत्तर के पर्वत-प्रदेश से भागा चला आ रहा था। मुद्दतों से उस प्रांत में हिंदू और मुसलमान साथ-साथ रहते चले आये थे। धार्मिक द्वेष का नाम... Continue Reading →

दिल्ली (मुहम्मद अल्वी )

बेहतर लिखने वाले लेखक, किसी शहर पर भी चंद पंक्तियों में ऐसा लिख सकते हैं कि पढ़ने वाला उन शब्दों के जादू में खो जाए| शायर मुहम्मद अल्वी साहब की रचनायें भी ऐसी ही आकर्षक हैं कि उन्हें सिर्फ एक बार पढ़ने... Continue Reading →

Mr & Mrs Iyer और पहलगाम : धर्म पहचान कर हत्या

अभिनेत्री एवं निर्देशक अपर्णा सेन ने सन 2002 में हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव पर एक फ़िल्म बनायी थी - Mr. and Mrs. Iyer जिसमें हिन्दू नायिका (कोंकना सेन सरमा) और मुस्लिम नायक (राहुल बोस) एक बस यात्रा के दौरान अलग बगल... Continue Reading →

भारतीय संस्कृति में गुरु की श्रेणियां : ओशो

अमेरिका में 1981 में ओशो के शिष्यों ने ओशो के लिए पी. आर. प्राप्त करने का आवेदन पत्र भरा था| 14 October, 1982 को Portland Oregon में इस सिलसिले में अमेरिकी इमिग्रेशन सर्विसेज़ ने ओशो का साक्षात्कार लिया और उनके एक प्रश्न ”क्या आप स्वयं को... Continue Reading →

बसंत : (अज्ञेय रचित नाटक)

राहुल गांधी, पं. नेहरु, हिमालय और संदीप दीक्षित,

नेता और अभिनेता में अंतर होता है और कैमरे के सामने तो यह अंतर बहुत ज्यादा स्पष्ट हो जाता है| हाल में श्री संदीप दीक्षित ने श्री राहुल गांधी के साथ एक पॉडकास्ट किया| संदीप दीक्षित दिल्ली की लम्बे समय... Continue Reading →

ओशो का दृष्टिकोण, हरिशंकर परसाई के आक्रमण पर

ओशो ने व्यंग्यकार श्री हरिशंकर परसाई की रचना और एक अखबार में अपने विरुद्ध लिखे लेख को किस तरह लिया? 11 सितम्बर 1976 को पूना आश्रम में “अष्टावक्र महागीता” श्रंखला पर प्रवचनों की शुरुआत करते हुए पहले प्रवचन में ओशो ने परसाई जी के एक लेख की चर्चा की|... Continue Reading →

टॉर्च बेचने वाले : “ओशो (आचार्य रजनीश)” पर “हरिशंकर परसाई” का आक्रमण 

(हरिशंकर परसाई) https://www.youtube.com/watch?v=oM7i4DNYkQA

सेक्युलरिज्म : भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा पाखण्ड ?

2015 के अक्तूबर और नवम्बर माह में हुए बिहार में विधानसभा चुनावों के समय आम आदमी पार्टी से बाहर हो चुके योगेन्द्र यादव ने एक राजनीतिक विश्लेषक के तौर पर भारत में सेक्युलरिज्म पर के बेहतरीन लेख लिखा था और... Continue Reading →

चंद्रशेखर : नीतिगत राजनीति वाले नेता

चंद्रशेखर एकमात्र प्रधानमंत्री रहे हैं देश के, जिनके बारे में निश्चित रूप से कहा जा सकता है कि चंद्रशेखर प्रधानमंत्री न बनते उस समय तो भारत को दिवालिया होने की शर्मिंदगी और फिर टूटने की शर्मनाक स्थितियों से गुज़ारना पड़ता|... Continue Reading →

अज्ञेय की दृष्टि में एकांकी नाटक

सीमा रेखा (नाटक) : विष्णु प्रभाकर

ब्रिटिश राज से भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त करके भारत में लोकतंत्र की स्थापना की और भारत का संविधान बनाया तो सब कुछ आदर्शवादी तासीर वाला रहा होगा| पर शनैः शनैः लोकतंत्र की मूल भावना से खिलवाड किया जाता रहा और... Continue Reading →

मास्टर, डॉक्टर और पुलिस : भ्रष्टाचार के तीन स्त्रोत?

गांधी जी के ग्रामीण विकास के सेनापति प्रो.कुमारप्पा

“भारत गाँवों में बसता है, अगर गाँव नष्ट होते हैं तो भारत भी नष्ट हो जायेगा| इंसान का जन्म जंगल में रहने के लिए नहीं हुआ बल्कि समाज में रहने के लिए हुआ है| एक आदर्श समाज की आधारभूत ईकाई... Continue Reading →

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