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Allahabad

Road to Sangam (2010) : गाँधी कलश यात्रा

महात्मा गाँधी की अस्थियों से भरा एक कलश उड़ीसा के एक बैंक के लॉकर में रखा रह जाता है और इकसठ बासठ सालों तक कोई उसकी सुध नहीं लेता और अंत में गाँधी जी के परपौत्र तुषार गाँधी कलश को... Continue Reading →

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आँधी (1975): तेरे बिना शिकवे न हों पर ज़िंदगी ज़िंदगी भी तो नहीं

दूर होने की कसक पुल बन जाती है अक्सर दिलों को क़रीब लाने को। पर अति निकटता के अहसासों की आँच जाने क्यों कभी कभी विलग कर देती है दिलों को। मानो संबंधों की ऊष्मा से घबरा जाते हों मन।... Continue Reading →

अमिताभ बच्चन : कवि पिता डा. हरिवंशराय बच्चन की कविता

फुल्ल कमल, गोद नवल, मोद नवल, गेहूं में विनोद नवल ! बाल नवल, लाल नवल, दीपक में ज्वाल नवल ! दूध नवल, पूत नवल, वंश में विभूति नवल ! नवल दृश्य, नवल दृष्टि, जीवन का नव भविष्य, जीवन की नवल... Continue Reading →

मेरा जूता है जापानी (Shri 420) : बिगड़े दिल फक्कड़ शहज़ादों की ठसक

“I do not want my house to be walled in on all sides and my windows to be stuffed. I want the cultures of all the lands to be blown about my house as freely as possible. But I refuse... Continue Reading →

Dharm(2007) : दिल न मंदिर, न मस्जिद, न गिरजा, न गुरुद्वारा

अदब आमोज़ है मयखाने का जर्रा-जर्रा सैंकड़ों तरह से आ जाता है सिजदा करना इश्क पाबंदे वफा है न कि पाबंदे रसूम सर झुकाने को नहीं कहते हैं सिजदा करना। बड़ा फर्क है सम्प्रदाय, जिसे लोग गलती से धर्म भी... Continue Reading →

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