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Khayyam

सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा : राज कपूर, तुम न जाने किस जहां में खो गए!

बड़े बाँध बनने से, माइनिंग के कारण, बहुत बड़े उद्योग लगने के कारण हुये स्थानीय लोगों के विस्थापन को नेहरू युग में देश में अन्यत्र रह रहे लोग महसूस भी न कर पाते होंगे| तब देश के नेता ने एक... Continue Reading →

ऋषि कपूर (1952-2020) : बचपन, जवानी, बुढ़ापा, शो का पटाक्षेप

 कोमल और प्रेममयी स्वर में टीचर : राजू तुम यहाँ क्या कर रहे हो? किशोर लड़का : मैडम मैं सर के सामने कंफैशन कर रहा था, मैंने पाप किया है| कहकर लड़का बाहर जाने लगता है जिससे उसे अपनी टीचर... Continue Reading →

तुम महकती जवां चाँदनी हो (प्यासे दिल 1974) : मुकेश के सिरमौर रत्नों में से एक

एक उम्दा गीत हरेक विभाग में उम्दा होता है। बढ़िया बोल, जिन्हे सुनकर श्रोता के अंदर वे कल्पनायें जन्म लेनें लगें जो कि गीत के शब्द उकेरे दे रहे हैं और कर्णप्रिय धुन और गायिकी, जिन्हे सुन श्रोता का मन... Continue Reading →

सब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा

शायर नज़ीर अकबराबादी (1735-1830) ने बंजारानामा के गीत “सब ठाठ पड़ा रह जावेगा” में मानव जीवन का सच उढ़ेल कर रख दिया। “लाद चलेगा बंजारा” भारत के आध्यात्मिक परिवेश का एक प्रतिनिधि भी है। टुक हिर्सो-हवा (लालच) को छोड़ मियां,... Continue Reading →

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