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Om Prakash

Sharda(1957): प्रेमिका सुहागन प्रेमी के पिता की

कल्पना कीजिये कि एक युवक की प्रेमिका परिस्थितिवश उसकी माँ बन जाये तो क्या हो? ऐसे रिश्ते से उपजे जटिल समीकरण को सुलझाने के लिए दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित दक्षिण और हिन्दी फिल्मों के प्रसिद्ध निर्माता-निर्देशक एल वी... Continue Reading →

Chutney (2016) : सच और कल्पना के पाटों के बीच पिसता हुआ होश

कहानी सुनाना तो एक कला है ही और कहानी को इस तरीके से सुनाना कि सुनने वाले साँस रोक कर सुनने के लिए बाध्य हो जाएँ तो ऐसी कथा वाचन कला बेहतरीन कला का नमूना बन जाती है| कहानी की... Continue Reading →

Tere Ghar Ke Samne (1963) : सर्दियों की नर्म धूप

  ...[राकेश] © https://cinemanthan.com/2013/09/18/tukahan/

कमर जलालाबादी

...[राकेश]

तू कहाँ ये बता इस नशीली रात में [तेरे घर के सामने(1963)]: एक नशीला रोमांटिक गीत

https://youtu.be/5RXY6k-2i2g?si=wczVKwUb_a37OCnT ...[राकेश]

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