समर्थ घर में जन्म न हो तो स्त्री का सौंदर्य उसके लिए सदा वरदान सिद्ध नहीं होता बल्कि बहुधा रूप उसके लिए जीवन पर ग्रहण भी लगा देता है| उम्र भर उसकी बहुत सारी ऊर्जा अपने रूप के कारण स्वयं... Continue Reading →
हाउस वाइफ बनाम हाउस हसबैंड पर बनी यह फ़िल्म बदलते दौर से कदमताल करती एक समसामयिक फ़िल्म है| अब स्त्री घरेलू ही नहीं रही है बल्कि हर वह काम घर से बाहर कर रही है जिसे पुरुष करते आ रहे... Continue Reading →
मजरुह ने शब्दों का विन्यास इस तरह से सजाया है कि गाने और विराम में एक ज़रा सी चूक लय बिगाड़ सकती थी लेकिन लता जी ने अन्तरों की लम्बी पंक्तियों को इस खूबसूरती से गाया है, एकदम उचित जगह... Continue Reading →
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