हर वक्त वक्त को मत कोसो यह एक समान नहीं रहता तुम देखो उसके हाथों में कब तीर कमान नही रहता फिर राह बनाओ अपनी तुम स्वप्निल अरमान नहीं रहता । इससे अच्छा जग में बोलो कोई मरहम कब मिला... Continue Reading →
जब मैंने कहा, तकरीबन बीस बरस पहले, कि आदमी-आदमी समान नहीं हैं, भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (सी.पी.आई) ने मेरी आलोचना करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया और कम्यूनिस्ट पार्टी के अध्यक्ष – एस. ऐ . डांगे ने घोषणा की कि शीघ्र ही उनका दामाद,... Continue Reading →
Recent Comments