बहुत प्यार पाया बहुत प्यार खोया बहुत मुस्कराया बहुत बार रोया मगर ज़िंदगी से शिकायत नहीं की। जिसे चाहता था वही खो गया किसी और का वो कहीं हो गया मगर एक बिरवा मुझे दे गया आकाश पीड़ा का... Continue Reading →
मैत्री,सख्य, प्रेम – इन का विकास धीरे-धीरे होता है ऐसा हम मानते हैं: ‘प्रथम दर्शन से ही प्रेम’ की सम्भावना स्वीकार कर लेने से भी इस में कोई अन्तर नहीं आता| पर धीरे-धीरे होता हुआ भी यह सम गति से... Continue Reading →
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