क्षार क्षार होना पड़ता है ज़ार ज़ार रोना पड़ता है कंचन काया का रूप हमेशा दरपन से बाहर था अंटता नहीं किसी आंख में जलवा इतना नाहर था राख हुई उस काया को भी अंजुरी में ढोना पड़ता है पल... Continue Reading →
राधिका : सुनंदा मौसी, प्लीज अपनी शादी से पहले मेरे कॉलेज में कृष्ण नाटक करवा दो न| मैंने अपनी ड्रामा टीचर से कह दिया है कि वार्षिक उत्सव के लिए नाटक मैंने तैयार कर लिया है और बस अब अभ्यास... Continue Reading →
* * * * * * * * * * * * * (शेष ...) ....[राकेश] ©
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