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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

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Song

क्या जाग रही होगी तुम भी प्रिये ! (एक प्रेम गीत)

स्त्री-पुरुष के मध्य पनपे प्रेम पर उच्च स्तरीय लेखन करने की आकांक्षा के भाव से दुनिया का हर लेखक एवम कवि अवश्य ही गुज़रता है| हर लिखने वाला चाहता है कि वह एक अमर प्रेम गीत लिख दे फिर चाहे... Continue Reading →

रिम-झिम गिरे सावन (Manzil 1979) : आई बरसात तो लता मंगेशकर ने समां बाँध दिया

https://www.youtube.com/watch?v=IRPCMEJpQaw&list=RDGMEMPipJmhsMq3GHGrfqf4WIqAVMIRPCMEJpQaw&start_radio=1 ...[राकेश]

रिम झिम गिरे सावन (Manzil 1979) : महागायक “किशोर कुमार” का सावन वर्णन

https://www.youtube.com/watch?v=OIsHPxP6bEo

राह पे रहते हैं (Namkeen 1982) : जल गए जो धूप में तो साया हो गए

https://www.youtube.com/watch?v=TMg5khs0UnI https://www.youtube.com/watch?v=CpYuH4Cc8Mk ...[राकेश] https://cinemanthan.com/2013/11/01/namkeen1982

सभी सुख दूर से गुज़रे (Aarambh 1976) : दुःख ही जब जीवन का स्थायी भाव बन जाए

कोविड संक्रमण के काल में जब लोग अपने प्रियजनों को खोते या बेहद कष्ट झेलते देखते जा रहे हैं तब इस गीत के दुःख के भाव का मुकाबला कम ही गीत कर सकते हैं| https://www.youtube.com/watch?v=GCIfOieDiHU https://youtu.be/-aLz0LWE-Jg?si=qO3JIdKnxhKaRLyR https://youtu.be/VQyheTapPkE?si=r0YQdFw2-iDKF1kc (Text) © CineManthan & Rakesh

बाँहों में चले आओ (Anamika 1973) : स्त्री प्रणय निवेदन का सुरीला शिखर

https://youtu.be/VVYrkjukYII?si=9lWOfsmEUlAZhxAz © ...[राकेश]

रोज़ रोज़ आँखों तले [जीवा (1986)] : मिसरी सी मीठी पहेली

संगीत : राहुल देब बर्मन, गीतकार - गुलज़ार , गायक द्वय - आशा भोसले एवं अमित कुमार , अभिनेता द्वय - मंदाकिनी एवं संजय दत्त गीत के वीडियो में एक अंतरा ( जीना तो सीखा है मर के....) नहीं है|... Continue Reading →

परेशां रात सारी है … … [सितारों के दोस्त – जगजीत सिंह]

भारत में अक्तूबर उत्सवों की शुरुआत का ही माह नहीं होता बल्कि मौसम के लिहाज से भी ये महीना राहत भरा होता है| दिन में धूप सुहानी प्रतीत होना शुरू हो जाती है| व्यक्तिगत दुखों को छोड़ दें तो प्रकृति... Continue Reading →

धूप आने दो (2020) : “गुलज़ार एवं ‘विशाल+रेखा’ भारद्वाज” की वैदिक सूर्य स्तुति

‘सूरज की पहली किरण से आशा का सवेरा जागे’ जीनियस किशोर कुमार द्वारा रचित पंक्ति गागर में सागर भरने की उक्ति को चिरतार्थ कर देती है| धरा पर मानव जीवन पर छाए “कोविड-19” के गहरे धुंध भरे साये तले सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक... Continue Reading →

सड़कों पे घूमता है अब कारवाँ हमारा : राज कपूर, तुम न जाने किस जहां में खो गए!

बड़े बाँध बनने से, माइनिंग के कारण, बहुत बड़े उद्योग लगने के कारण हुये स्थानीय लोगों के विस्थापन को नेहरू युग में देश में अन्यत्र रह रहे लोग महसूस भी न कर पाते होंगे| तब देश के नेता ने एक... Continue Reading →

रमैय्या वस्तावैय्या (Shri 420) … राम तेरा दिल और कर्म मैले

रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया,  मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में... Continue Reading →

फिर से अइयो बदरा बिदेसी (नमकीन 1982) … गुलज़ार का मेघदूत

अगर कभी गुलज़ार के किसी पुराने गीत को उन्हे अपने स्वर देने पड़ें तो यह गीत सर्वश्रेष्ठ अवसर उत्पन्न करता है उनके लिए| ...[राकेश] https://youtu.be/BfeJ-tuUoIc?si=GAonq-Xo3g4RN6PO ©

हमने देखी हैं उन आँखों की महकती खुशबू (Khamoshi 1969) : अनूठे मुखड़े से सजा प्रेमगीत ग्रंथ

...[राकेश] https://youtu.be/doPtBhDTpj0?si=st9Jv6ShXnVzrATS https://cinemanthan.com/2013/10/04/khamoshi1969 ©

महंगाई डायन खाए जात है : अभावग्रस्त भारत की टीस को उकेरता व्यंग्य गीत

भारत की सरकारों का सौभाग्य रहा है कि देशवासियों की कमर तोड़ने वाले मुद्दों को लेकर भी भारतवासी सड़कों पर नहीं उतरते बल्कि किसी न किसी तरह से इन अव्यवस्थाओं से पार पाने की सहन शक्ति विकसित कर लेते हैं... Continue Reading →

116 चाँद की रातें (Ijaazat 1987) : माया का ख़त

…[राकेश]

यही मेरी ज़िंदगी है (Dev D 2009): MMS के ग्रहण से अंधकार में डूबी चन्दा

देव डी फिल्म का यह गीत अपने आप में एक सम्पूर्ण फिल्म है और यह फिल्म के तीन मुख्य पात्रों में से एक लैनी (Kalki Koechlin) की जीवनकथा को संक्षेप में बयान कर देता है। यह गीत जिस तरह से... Continue Reading →

रांझा रांझा (Raavan 2010) : सूफी अद्वैत से फ़िल्मी द्वैत तक

पहुँचे हुये संतो, सिद्धों और सूफियों ने हमेशा अपने और प्रभु के बीच अद्वैत की कल्पना की है या बात की है या दुनिया को बताया है कि आत्मा परमात्मा के साथ एकाकार हो गयी है। वे लगातार स्तुति से,... Continue Reading →

दिल तो बच्चा है जी (Ishqiya 2010) : पाजी दिल के करिश्मे

ये कहना अतिशयोक्ति न होगी कि फ़िल्म की सिचुएशन के हिसाब से ” दिल तो बच्चा है जी ” दशक के सबसे अच्छे दस गीतों में से एक है| एक लिहाज से ये गीत पचास और साठ के दशक के... Continue Reading →

जरा थम जा तू (Jogan 1950) : कोयल गर गाती गीतादत्त जैसा ही कूकती

जरा थम जा तू ए सावनमेरे साजन को आने दे आने देमेरे रुठे पिया को फिरमेरी बिगड़ी बनाने दे ओढ़नी पे बिजलियों की गोट मैं लगाऊंगीपीस के काली घटायें काजल बनाऊँगी गरज बादल की अपने दिल की धड़कन में बसाऊँगी... Continue Reading →

कुहू कुहू बोले कोयलिया (Suvarna Sundari– 1957) : मधुर रागमाला, नायाब संगीत

https://youtu.be/ANfV8VnzrYs?si=sv35zFCNO8DmBnrz …[राकेश]

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