अपनी पीड़ा ही पीड़ा है यह सोच कभी भी ठीक नहीं इस दुनिया में है कौन बचा पीड़ा जिसके नजदीक नहीं सुख याद नहीं रहता सच है युग भी उसमें पल बन जाता पर दुख की फितरत ही ऐसी आता... Continue Reading →
अपनी राहों पर लौट गए मुझसे प्रेमिल मिलने वाले वो रुकते भी तो क्या रुकते मौसम में थे खिलने वाले । वो मिले अचानक साथ चले मौसम था फूले और फले फिर मौसम जैसे बीत गया मिट गए कि जैसे... Continue Reading →
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