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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

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Cinema

Swami (1977): प्रेम का धागा पति से टूटे या प्रेमी से?

सत्तर के दशक में बासु दा बहुत तेज रफ्तार से फिल्में बनाते थे और उनकी उस दौरान बनायी गयी फिल्मों की गुणवत्ता सराहनीय है। सत्तर के दशक की उनकी फिल्में बार बार देखी जाती हैं और तब भी न तो... Continue Reading →

Peepli Live(2010): न्यू इंडिया और इसके मीडिया के मुँह पर तमाचा लगाता गरीब देहाती हिन्दुस्तान

प्रसिद्ध कवि रामावतार त्यागी की एक कविता की पंक्त्तियाँ हैं जी रहे हो जिस कला का नाम ले ले कुछ पता भी है कि वह कैसे बची है? सभ्यता की जिस अटारी पर खड़े हो, वही हम बदनाम लोगों ने... Continue Reading →

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

चरित्रचित्रण की ऐसी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिल्म को RED कैमरे के द्वारा शूट किया गया और सिनेमेटोग्राफर Robert Shacklady के कैमरे ने लंदन में फिल्माए भागों को खूबसूरती से पकड़ा है। एक अंतर जो दिखता है... Continue Reading →

Yeh Saali Zindagi (2011): प्रेम की ख्वाहिश पे दम निकले

ये साली ज़िंदगी, विकसित प्रेम-कहानियाँ और क्राइम थ्रिलर्स, दोनों ही किस्म की फिल्में देखने वाले दर्शकों को लुभा सकती है । ©…[राकेश]

Tickets(2005): तीन निर्देशक और तीन कहानियां एक ट्रेन में

©...[राकेश] https://youtu.be/zViD9yRse1g?si=AYtj7gNhgS2t7xKW

Offside (2006) : जीत सिनेमा और स्वतंत्रता की

©...[राकेश]

Haat The Weekly Bazaar : सामंतवादी पुरुष समाज में चीरहरण सहने को विवश स्त्री शक्त्ति की विजय गाथा

औरत ने जनम दिया मरदों को, मरदों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कही दिनारो में, बिकती है कही बाजारों में नंगी नचवाई जाती है अय्याशों के दरबारों में ये... Continue Reading →

3-Iron (2004): यथार्थ और कल्पना के बीच संतुलन

©...[राकेश]

Mr Singh Mrs Mehta (2010): Nudity or Nakedness?

...[राकेश] https://youtu.be/Emv1nFGA3Oo?si=Xc5oYUmBX1yilcKj

My Brother Nikhil(2005): खुशहाल जीवन निगलता AIDS रूपी ब्लैकहोल

©…[राकेश]

Shukno Lanka(2010) : एक्स्ट्रा से नायक बनने वाले अभिनेता की गाथा

©...[राकेश] https://youtu.be/ozbp0wgxnU4?si=uRImjCA051MM8aTW

Kanchivaram 2008 : जब सिल्क के रेशे भी खुरदुरे लगें ज़िन्दगी को

कवि धूमिल की अंतिम कविता – लोहे का स्वाद- एक तरह से करोड़ों शोषितों की चुप्पी को जुबान देती है। प्रियदर्शन की फिल्म कांजीवरम एक सामंजस्य स्थापित करती है उस कविता से। शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो... Continue Reading →

Eskiya – The Bandit (1996) : तुर्की डाकू की प्रेमकहानी

© ...[राकेश] https://youtu.be/J-pSteDL6g4?si=jwN0So3lzO2IpBvQ

A man in our house (1961): जनांदोलन और प्रेमकहानी का सहअस्तित्व

बोल कि लब आज़ाद हैं तेरे बोल ज़बाँ अब तक तेरी है तेरा सुतवाँ जिस्म है तेरा बोल कि जाँ अब तक तेरी है देख के आहंगर की दुकां में तुंद हैं शोले सुर्ख़ है आहन खुलने लगे क़ुफ़्फ़लों के... Continue Reading →

The White Balloon (1995): जफर पनाही की स्वतंत्रता कब उड़ान भरेगी?

© ...[राकेश]

The Other End of the Line (2008) : इंडो-अमेरिकन प्रेमकहानी

ओह्ह्ह्ह मुम्बई तो भारत का New York है और वहाँ नौकरियों का विस्फोट हो गया है अमेरिकी धनी Kit Hawksin अपने होटल में ठहरी हुयी भारत से अमेरिका गयी प्रिया से मिलने पर  कहता है। मैं New York को अमेरिका... Continue Reading →

स्मिता पाटिल : प्रतिभावान लड़की को भी समझौते करने पड़ते हैं|

अभिनेत्रियाँ तो स्मिता पाटिल से पहले भी बहुत आयीं और बाद में भी पर भारतीय सिनेमा में सबसे ज्यादा कमी किसी अभिनेत्री की खलती है तो वह स्मिता पाटिल ही हैं। नवम्बर 1985 में हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री कृष्ण... Continue Reading →

i Am KALAM(2010): खुदी को कर बुलंद इतना…

बेहद संतोष की बात है कि Smile Foundation जैसी गैर-सरकारी समाजसेवी संस्था ऐसी फिल्म के निर्माण के लिये आगे आयी। …[राकेश]

दो नैनों में (Khushboo 1975) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक के संगम का जादू

© …[राकेश] https://youtu.be/i_7PShD6gMM?si=PA6Gz1VJvI36DDFY https://youtu.be/v_qs7436aA4?si=T7dLjOamDU0sCqLy

तुम एक गोरखधंधा हो…याखुदा जवाब नहीं

…[राकेश] https://youtu.be/mXY5-TK2sJ0?si=D7z5et6E_Rt6GT4L

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