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Cinema

Kissa Kursi Ka : लालकृष्ण आडवाणी से एक करोड़ मुआवजा मांगते अमृत नाहटा का पत्र

नोट: शैक्षणिक व अव्यवसायिक उपयोग के लिये हिन्दी सिनेमा के इतिहास से सम्बंधित एक विवादास्पद फिल्म के निर्माता के पत्र का हिंदी रुपांतरण प्रस्तुत किया गया है।

Kissa Kursi Ka : हिंदी सिनेमा की सबसे ज्यादा विवादास्पद फिल्म का इतिहास

नोट: शैक्षणिक व अव्यवसायिक उपयोग के लिये हिन्दी सिनेमा के इतिहास से सम्बंधित एक विवादास्पद फिल्म के निर्माता के लेख का हिंदी रुपांतरण प्रस्तुत किया गया है।

Invictus (2009): खेल से राष्ट्रीय एकता बसाने वाला जननेता

Out of the night that covers me, Black as the Pit from pole to pole, I thank whatever gods may be For my unconquerable soul. In the fell clutch of circumstance I have not winced nor cried aloud. Under the... Continue Reading →

नमकीन (1982) : चौरंगी में झांकी चली

https://www.youtube.com/watch?v=hLWJ3pWy2ac https://www.youtube.com/watch?v=erkeCqZp7os …[राकेश]

Dus Tola (2010) : गुलज़ार की सोने की खान से कुछ स्वर्ण-मुद्राएं

…[राकेश]

Jagte Raho (1956): न जागा है न जागेगा “भारत”

...[राकेश] https://youtu.be/S3Lhs8HEC_I?si=633obFDq1l4icFzN

Maya (2001) : गढी हुयी सामाजिक कुरीति के नाम कन्या की बलि चढाती फिल्म

©...[राकेश]

Road to Sangam (2010) : गाँधी कलश यात्रा

...[राकेश]

Khela(2008): ऋतुपर्णो घोष, नये अंदाज में

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Well Done Abba (2010): गरीबी और सिलिकॉन इम्प्लान्ट्स के बाजार के बीच फंसे देश की हास्यास्पद स्थिति

“वेल डन अब्बा“ अभाव और समृद्धि के निर्लज्ज प्रदर्शन के दो विरोधी पाटों के बीच पिसते भारत पर व्यंग्य करती एक कहानी को दिखाती है। श्याम बेनेगल इस फिल्म में भ्रष्ट भारतीय समाज में समस्यायों से दो चार होते एक... Continue Reading →

Road Movie (2010): जीना है ज़िन्दगी का धर्म और मर्म

©...[राकेश]

City of Gold (2010) : गरीबी को पटखनी देती अमीरी

महेश मांजरेकर की फिल्म City of Gold अमीरी गरीबी के बीच संघर्ष की राजनीति को दिखाती है। उदारीकरण के बाद से हिन्दी सिनेमा ने गरीब और अमीर के बीच के अन्तर को दर्शाती हुयी फिल्में बनाना बंद कर दिया था... Continue Reading →

Swami (1977): प्रेम का धागा पति से टूटे या प्रेमी से?

सत्तर के दशक में बासु दा बहुत तेज रफ्तार से फिल्में बनाते थे और उनकी उस दौरान बनायी गयी फिल्मों की गुणवत्ता सराहनीय है। सत्तर के दशक की उनकी फिल्में बार बार देखी जाती हैं और तब भी न तो... Continue Reading →

Peepli Live(2010): न्यू इंडिया और इसके मीडिया के मुँह पर तमाचा लगाता गरीब देहाती हिन्दुस्तान

प्रसिद्ध कवि रामावतार त्यागी की एक कविता की पंक्त्तियाँ हैं जी रहे हो जिस कला का नाम ले ले कुछ पता भी है कि वह कैसे बची है? सभ्यता की जिस अटारी पर खड़े हो, वही हम बदनाम लोगों ने... Continue Reading →

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

चरित्रचित्रण की ऐसी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिल्म को RED कैमरे के द्वारा शूट किया गया और सिनेमेटोग्राफर Robert Shacklady के कैमरे ने लंदन में फिल्माए भागों को खूबसूरती से पकड़ा है। एक अंतर जो दिखता है... Continue Reading →

Yeh Saali Zindagi (2011): प्रेम की ख्वाहिश पे दम निकले

ये साली ज़िंदगी, विकसित प्रेम-कहानियाँ और क्राइम थ्रिलर्स, दोनों ही किस्म की फिल्में देखने वाले दर्शकों को लुभा सकती है । ©…[राकेश]

Tickets(2005): तीन निर्देशक और तीन कहानियां एक ट्रेन में

©...[राकेश] https://youtu.be/zViD9yRse1g?si=AYtj7gNhgS2t7xKW

Offside (2006) : जीत सिनेमा और स्वतंत्रता की

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Haat The Weekly Bazaar : सामंतवादी पुरुष समाज में चीरहरण सहने को विवश स्त्री शक्त्ति की विजय गाथा

औरत ने जनम दिया मरदों को, मरदों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कही दिनारो में, बिकती है कही बाजारों में नंगी नचवाई जाती है अय्याशों के दरबारों में ये... Continue Reading →

3-Iron (2004): यथार्थ और कल्पना के बीच संतुलन

©...[राकेश]

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