फिल्म बड़ी कुशलता से वर्तमान युग की समस्या- पानी की कमी, को जादुई, परीकथा, दंतकथा और सुपरमैन जैसी कथाओं के अंदाज देकर रोचक अंदाज में दर्शक के सम्मुख प्रस्तुत करती है| यदि भगीरथ की कथा को छोड़ दें, जिसने कथित... Continue Reading →
जीवन हमेशा ही पलक झपकते ही अपना रुख बदल लेता है| बस एक क्षण का समय ही पर्याप्त होता है जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के घटित होने के लिए| आसानी से चल रहा जीवन एक तीव्र मोड़ ले... Continue Reading →
अपने ‘मैं’ को खोकर जिसे पाते वह सौगात ‘प्रेम’ की! प्रेम में पहले दूसरा स्वयं से महत्वपूर्ण हो जाता है फिर दोनों के ‘मैं’ कुछ समय के लिए एक हो जाते हैं और एक समय आता है जब व्यक्ति को... Continue Reading →
जिसने ‘दृश्यम’ फिल्म का मूल मलयाली संस्करण (मोहन लाल अभिनीत) और कमल हसन अभिनीत तमिल संस्करण नहीं देखे हैं उनके लिए फिल्म का अजय देवग्न अभिनीत हिंदी संस्करण एक अच्छे थ्रिलर देखने का आनंद प्रस्तुत करता है और मूल मलयाली... Continue Reading →
‘ ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©
“मैडम जी, शहर में जहां बड़े बड़े मॉल खत्म हो जाते हैं न बस डेमोक्रेसी भी वहीं समाप्त हो जाती है”| एक पुलिस इन्स्पेक्टर फिल्म की नायिका मीरा (Anushka Sharma) से कहता है और उसे समझाता है कि पुलिस वाले... Continue Reading →
आगाज़ तो होता है अंजाम नहीं होता जब मेरी कहानी में वो नाम नहीं होता जब जुल्फ की कालिख में घुल जाये कोई राही बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता हँस-हँस के जवां दिल के हम क्यों न चुनें टूकड़े... Continue Reading →
इन्स्पेक्टर सात्यिकी की भूमिका में Parambrata Chatterjee सहज और आकर्षक लगे हैं| विद्या बालन के अलावा सबसे ज्यादा ध्यान खींचते हैं Saswata Chatterjee जिन्होंने बॉब विश्वास की भूमिका निभाई है| उनकी मुस्कान और उनकी शैतानियत का संगम एक आकर्षक स्क्रीन... Continue Reading →
एक समय तक भारत के हरेक विद्यार्थी को सामान्य ज्ञान की परीक्षाओं में भारत के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े दो प्रश्न काफी परेशान करते थे (शायद अभी भी करते हों)। सवाल थे - दिल्ली चलो का नारा किसने दिया था।... Continue Reading →
किसी भी गीत को उम्दा बनाने के लिये संगीतकार, गायक और गीतकार तीनों के बेहतरीन योगदान की जरुरत होती है और किसी एक का भी योगदान कमतर हो तो गीत की गुणवत्ता और आयु कम हो जाती है। तीनों में... Continue Reading →
भारत की सरकारों का सौभाग्य रहा है कि देशवासियों की कमर तोड़ने वाले मुद्दों को लेकर भी भारतवासी सड़कों पर नहीं उतरते बल्कि किसी न किसी तरह से इन अव्यवस्थाओं से पार पाने की सहन शक्ति विकसित कर लेते हैं... Continue Reading →
श्री 420 के एक गीत की एक पंक्ति है ” एक तारा न जाने कहाँ खो गया “। 14 दिसम्बर 1924 को जन्मे राज कपूर की भौतिक शरीर रुपी उपस्थिति तो जरुर 2 जून 1988 को धरा से विलीन हो... Continue Reading →
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