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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Mausam

आने वाले, चले गए, चले जायेंगे …

अपनी राहों पर लौट गए मुझसे प्रेमिल मिलने वाले वो रुकते भी तो क्या रुकते मौसम में थे खिलने वाले । वो मिले अचानक साथ चले मौसम था फूले और फले फिर मौसम जैसे बीत गया मिट गए कि जैसे... Continue Reading →

लता मंगेशकर : भारत का गौरव ही नहीं, स्वाभिमान भी

(https://cinemanthan.com/2013/10/15/donainonmeinansoo/)

गुलज़ार : नीली नदी के परे गीला सा चांद खिल गया

हिंदी सिनेमा की नदी में तैरते बहते एक दिन “अचानक” यूँ हो जाता है कि व्यक्ति का “परिचय” सतरंगी छटाएं बिखेरते श्वेत-धवल “लिबास” पहने एक संजीदा कलाकार के अनूठे रचनात्मक संसार से हो जाता है और वहां से आगे वह... Continue Reading →

नमकीन (1982) : चौरंगी में झांकी चली

https://www.youtube.com/watch?v=hLWJ3pWy2ac https://www.youtube.com/watch?v=erkeCqZp7os …[राकेश]

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