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Amrita Preetam

धूप आने दो (2020) : “गुलज़ार एवं ‘विशाल+रेखा’ भारद्वाज” की वैदिक सूर्य स्तुति

‘सूरज की पहली किरण से आशा का सवेरा जागे’ जीनियस किशोर कुमार द्वारा रचित पंक्ति गागर में सागर भरने की उक्ति को चिरतार्थ कर देती है| धरा पर मानव जीवन पर छाए “कोविड-19” के गहरे धुंध भरे साये तले सामाजिक-आर्थिक-राजनीतिक... Continue Reading →

Raavan (1984) : रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़

तेरे इश्क की एक बूँदइसमें मिल गयी थीइसलिये मैंने उम्र कीसारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम)   कैसे रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़आके देखे तो सही ये भी नज़ारा कोई © …[राकेश]

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