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#JaunElia

मुझे ले चलो आज फिर उस गली में (शराबी 1964)

मुझे ले चलो, आज फिर उस गली मेंजहाँ पहले पहल, ये दिल लड़खड़ायावो दुनिया, वो मेरी मोहब्बत की दुनियाजहां से मैं बेताबियां लेकर के आया जहाँ सो रही है मेरी जिंदगानी जहाँ छोड़ आया मैं अपनी जवानीवहां आज भी एक... Continue Reading →

M F Husain : The White

हुसेन साहब के जलवे प्रदर्शनी का शीर्षक था - श्वेताम्बरी ! हुसेन साहब तब जॉन एलिया की नज़्म - रम्ज़ भी गुनगुना सकते थे | तुम जब आओगी तो सोया हुआ पाओगी मुझे मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ... Continue Reading →

नरेश कुमार ‘शाद’ : परिचय एवं शायरी

हर शब्द का अर्थ ज़रूर होता है, फिर शब्द अगर शब्दों के जादूगरों की कलम की पैदाइश हों तो  तो क्या कहिये! यूँ सभी श्रद्धेय हैं पर आधुनिक युग के ये हजरात – जैसे साहिर लुधियानवी साहिब, कृष्ण बिहारी नूर... Continue Reading →

रोते रोते गुज़र गई रात रे [Buzdil (1951)]…

चेतावनी : कमजोर ह्रदय के श्रोता, विशेषकर प्रेम में वियोग झेल रहे व्यक्ति, और ऐसे व्यक्ति जिन्होंने कभी भी जीवन में सच में प्रेम को जीवन में जिया हो, इस गीत को रात की तन्हाइयों में लगातार न सुनें| उर्दू... Continue Reading →

जॉन एलिया : सिनेमा के परदे पर कब?

  [ सालहा साल और एक लम्हाकोई भी तो ना इनमे बल आया खुद ही एक दर पर मैंने दस्तक दीखुद ही लड़का सा मैं निकल आया उर्दू शायरी के गुलशन में हज़ारों फूलों ने अहसास की अमिट खुशबू बिखेरी... Continue Reading →

कसमें वादे प्यार वफ़ा सब [उपकार (1967)] : किशोर कुमार की नासमझी, मन्ना डे की किस्मत  

  ...[राकेश]

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