अपनी पीड़ा ही पीड़ा है यह सोच कभी भी ठीक नहीं इस दुनिया में है कौन बचा पीड़ा जिसके नजदीक नहीं सुख याद नहीं रहता सच है युग भी उसमें पल बन जाता पर दुख की फितरत ही ऐसी आता... Continue Reading →
अपनी पीड़ा ही पीड़ा है यह सोच कभी भी ठीक नहीं इस दुनिया में है कौन बचा पीड़ा जिसके नजदीक नहीं सुख याद नहीं रहता सच है युग भी उसमें पल बन जाता पर दुख की फितरत ही ऐसी आता... Continue Reading →
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