हर वक्त वक्त को मत कोसो यह एक समान नहीं रहता तुम देखो उसके हाथों में कब तीर कमान नही रहता फिर राह बनाओ अपनी तुम स्वप्निल अरमान नहीं रहता । इससे अच्छा जग में बोलो कोई मरहम कब मिला... Continue Reading →
हर वक्त वक्त को मत कोसो यह एक समान नहीं रहता तुम देखो उसके हाथों में कब तीर कमान नही रहता फिर राह बनाओ अपनी तुम स्वप्निल अरमान नहीं रहता । इससे अच्छा जग में बोलो कोई मरहम कब मिला... Continue Reading →
© Krishna Bihari Painting : Dejected Dr. Gachet by Vincent Von Gogh
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