जरा थम जा तू ए सावनमेरे साजन को आने दे आने देमेरे रुठे पिया को फिरमेरी बिगड़ी बनाने दे ओढ़नी पे बिजलियों की गोट मैं लगाऊंगीपीस के काली घटायें काजल बनाऊँगी गरज बादल की अपने दिल की धड़कन में बसाऊँगी... Continue Reading →
फिल्म का नायक अगर पूरी फिल्म में एक भी संवाद न बोले और नायिका भी केवल दो बार मुँह से आवाज निकाले, एक बार चीखने के लिये और दूसरी बार नायक को I Love You बोलने के लिये, तो जिन्होने... Continue Reading →
शुरु से ही आशा भोसले की गायिकी उस ऊँचाई पर उड़ती रही है जहाँ से वह हरेक दौर में सक्रिय बड़े से बड़े संगीतकार को इठलाकर जताती रही है कि जनाब सृष्टि में हम भी श्रेष्ठ गायकों के साथ उपस्थित... Continue Reading →
अस्सी के दशक में प्रकाश पदुकोण द्वारा ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैम्पियनशिप जीतने से शुरुआत कर, मॉस्को ओलम्पिक में हाकी का स्वर्ण पदक जीतने, एशियाड 82 के आयोजन से लेकर कपिल देव की टीम द्वारा 1983 में क्रिकेट का विश्व जीतने... Continue Reading →
ऊँच-नीच के अंतर के सागर में गहराई तक डूबे भारतीय समाज में फिल्मी दुनिया भी इस बीमारी से अछूती नहीं रही है। वहाँ ऊँच-नीच के भेदभाव कुछ अलग तरीके के हैं। वहाँ नायक की भूमिकायें निभाने वाले अभिनेता, जो व्यवसायिक... Continue Reading →
कवि धूमिल की अंतिम कविता – लोहे का स्वाद- एक तरह से करोड़ों शोषितों की चुप्पी को जुबान देती है। प्रियदर्शन की फिल्म कांजीवरम एक सामंजस्य स्थापित करती है उस कविता से। शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो... Continue Reading →
ज्यादातर समाज कई सारे धरातलों पर जीते हैं और कोई एक परिभाषा उनका प्रतिनिधित्व नहीं कर सकती। बच्चे भी अक्सर समाज में व्याप्त धारणाओं से ही सीखते हैं। समाज में बड़े जैसा कर रहे होते हैं बच्चे भी जाने अन्जाने... Continue Reading →
ओह्ह्ह्ह मुम्बई तो भारत का New York है और वहाँ नौकरियों का विस्फोट हो गया है अमेरिकी धनी Kit Hawksin अपने होटल में ठहरी हुयी भारत से अमेरिका गयी प्रिया से मिलने पर कहता है। मैं New York को अमेरिका... Continue Reading →
बेहद संतोष की बात है कि Smile Foundation जैसी गैर-सरकारी समाजसेवी संस्था ऐसी फिल्म के निर्माण के लिये आगे आयी। …[राकेश]
स्पेनिश भाषा में 2004 में बनी फिल्म का शीर्षक El habitante incierto था। यूरोप में इसे The Uncertain Guest शीर्षक से रिलीज किया गया और DVD पर इसे The Univited Guest नामक शीर्षक दिया गया है। यह एक ऐसा थ्रिलर... Continue Reading →
तेरे इश्क की एक बूँदइसमें मिल गयी थीइसलिये मैंने उम्र कीसारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम) कैसे रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़आके देखे तो सही ये भी नज़ारा कोई © …[राकेश]
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