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Cine Manthan

Cinema, Theatre, Music & Literature

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Indian Cinema

Life Goes On (2009) : यादों और सांस्कृतिक टकराव के चक्रव्यूह

चरित्रचित्रण की ऐसी बारीकियों पर ध्यान नहीं दिया गया है। फिल्म को RED कैमरे के द्वारा शूट किया गया और सिनेमेटोग्राफर Robert Shacklady के कैमरे ने लंदन में फिल्माए भागों को खूबसूरती से पकड़ा है। एक अंतर जो दिखता है... Continue Reading →

Yeh Saali Zindagi (2011): प्रेम की ख्वाहिश पे दम निकले

ये साली ज़िंदगी, विकसित प्रेम-कहानियाँ और क्राइम थ्रिलर्स, दोनों ही किस्म की फिल्में देखने वाले दर्शकों को लुभा सकती है । ©…[राकेश]

Haat The Weekly Bazaar : सामंतवादी पुरुष समाज में चीरहरण सहने को विवश स्त्री शक्त्ति की विजय गाथा

औरत ने जनम दिया मरदों को, मरदों ने उसे बाज़ार दिया जब जी चाहा मसला कुचला, जब जी चाहा धुत्कार दिया तुलती है कही दिनारो में, बिकती है कही बाजारों में नंगी नचवाई जाती है अय्याशों के दरबारों में ये... Continue Reading →

Mr Singh Mrs Mehta (2010): Nudity or Nakedness?

...[राकेश] https://youtu.be/Emv1nFGA3Oo?si=Xc5oYUmBX1yilcKj

My Brother Nikhil(2005): खुशहाल जीवन निगलता AIDS रूपी ब्लैकहोल

©…[राकेश]

Shukno Lanka(2010) : एक्स्ट्रा से नायक बनने वाले अभिनेता की गाथा

©...[राकेश] https://youtu.be/ozbp0wgxnU4?si=uRImjCA051MM8aTW

Kanchivaram 2008 : जब सिल्क के रेशे भी खुरदुरे लगें ज़िन्दगी को

कवि धूमिल की अंतिम कविता – लोहे का स्वाद- एक तरह से करोड़ों शोषितों की चुप्पी को जुबान देती है। प्रियदर्शन की फिल्म कांजीवरम एक सामंजस्य स्थापित करती है उस कविता से। शब्द किस तरह कविता बनते हैं इसे देखो... Continue Reading →

i Am KALAM(2010): खुदी को कर बुलंद इतना…

बेहद संतोष की बात है कि Smile Foundation जैसी गैर-सरकारी समाजसेवी संस्था ऐसी फिल्म के निर्माण के लिये आगे आयी। …[राकेश]

दो नैनों में (Khushboo 1975) : निर्देशक, कवि गुलज़ार की कल्पना और तकनीक के संगम का जादू

© …[राकेश] https://youtu.be/i_7PShD6gMM?si=PA6Gz1VJvI36DDFY https://youtu.be/v_qs7436aA4?si=T7dLjOamDU0sCqLy

तुम एक गोरखधंधा हो…याखुदा जवाब नहीं

…[राकेश] https://youtu.be/mXY5-TK2sJ0?si=D7z5et6E_Rt6GT4L

Raavan (1984) : रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़

तेरे इश्क की एक बूँदइसमें मिल गयी थीइसलिये मैंने उम्र कीसारी कड़वाहट पी ली ….( अमृता प्रीतम) कैसे रो रो के पिघलते हैं गुनाहों के पहाड़आके देखे तो सही ये भी नज़ारा कोई © …[राकेश]

एक रुका हुआ फैसला (1986): निष्पक्ष तार्किकता और न्याय की विजय

कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर …[राकेश]

Saudagar (1973): चाहत भी जब व्यापार बन जाये

https://youtu.be/rsuzrIVoFYY?si=lJkmnH9lAZL1N80f ©…[राकेश]

Abhimaan (1973) : अमिताभ- जया श्रेष्ठ हैं या कला और प्रतिभा?

उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और सुबीर की शादी के स्वागत समारोह के बाद यह उमा और चित्रा की दूसरी ही... Continue Reading →

वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी, बचपन और वो जगजीत सिंह: कौन भूला है यहाँ कोई न भूलेगा यहाँ

कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ-साथ चलते हैं (बशीर बद्र) मैं रोया परदेश में भीगा माँ का प्यार, दुख ने दुख से बात की बिन चिट्ठी बिन तार निदा फाज़ली के ही दोहे... Continue Reading →

Partition (2007) : भारत के हिंसक विभाजन में जन्मी प्रेमकथा

भारतीय दर्शकों को खटक सकता है नसीम की भूमिका को विदेशी अभिनेत्री Kristin Kreuk से करवाया जाना। शुरु में उन्हे एक मुस्लिम महिला के रुप में स्वीकार करने में कठिनाई भी होती है पर यह एक हॉलीवुड प्रोडक्शन है और... Continue Reading →

Yathharth (2002): चाण्डाल का बदरंग जीवन

©...[राकेश]

The Beguiled(1971): स्त्री संसार में छलिया Clint Eastwood

©…[राकेश]

जाने वाले मुड़ के (श्री 420) : राज कपूर की तकनीकी श्रेष्ठता

विवश श्वेत वस्त्रधारी अशरीरी अंतर्मन वापिस नरगिस के शरीर में प्रवेश कर जाता है। लता मंगेशकर ने अपनी गायिकी से इस गीत में उपस्थित दुख भरे भावों को गहरायी प्रदान की है। चाहे वह आवारा का ड्रीम सीक्वेंस हो या... Continue Reading →

कहीं करती होगी वो मेरा इंतजार: मुकेश के गीत में लता की “हॆ”

यह गीत हृषिकेष मुखर्जी की फिल्म फिर कब मिलोगी (1974) का है। इसे लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीतबद्ध किया था आर.डी.बर्मन/पंचम ने। फिल्म में यह यह गीत दो बार आता है। पहली बार यह एकल गीत के रुप... Continue Reading →

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