स्त्री स्वरों में गाये गये गीत पुरुष स्वरों में गाये गीतों से ज्यादा अच्छे हैं। सुनो नंद रानी, ओ री सौतनियाँ, न जाने कहाँ बंसी बजाये घनश्याम, कहाँ छोड़ी मुरली कहाँ छोड़ी राधा, बन नौ रसमय, और मुरली तुम्हारी अजब... Continue Reading →
कवि दिनकर ने चेताया था कभी कहकर …[राकेश]
फुल्ल कमल, गोद नवल, मोद नवल, गेहूं में विनोद नवल ! बाल नवल, लाल नवल, दीपक में ज्वाल नवल ! दूध नवल, पूत नवल, वंश में विभूति नवल ! नवल दृश्य, नवल दृष्टि, जीवन का नव भविष्य, जीवन की नवल... Continue Reading →
उमा (जया भादुड़ी) अपने पति सुबीर (अमिताभ बच्चन) को घर ले जाने के लिये सुबीर की दोस्त चित्रा (बिन्दु) के घर आती हैं। उमा और सुबीर की शादी के स्वागत समारोह के बाद यह उमा और चित्रा की दूसरी ही... Continue Reading →
ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल जाती है कभी दुश्मन तो कभी दोस्त नज़र आती है। कभी छा जाये बरस जाये घटा बेमौसम कभी एक बूँद को रुह तरस जाती है ज़िन्दगी रोज नये रंग में ढ़ल... Continue Reading →
जस्सी के बारे में विस्तार से यहाँ पढ़ा जा सकता है। Justice For Jassi जस्सी हत्याकांड पर आधारित कनेडियन टेलीविज़न की डॉक्यूमेंटरी -The Murdered Bride © ...[राकेश]
व्यवसायिक फिल्मों के सुपर स्टार्स में से बिरले ही ऐसे होंगे जो अपनी बनी बनायी छवि को खुद ही तोड़ने की कोशिश करेंगे। अमेरिकी साहित्य का एक उपवर्ग है Southern Gothic और लेखक Thomas P. Cullinan ने इसी उपवर्ग के... Continue Reading →
व्यक्ति से बड़ी उसकी छवि होती है यह तो एक सिद्ध सी बात है और छवि अगर व्यक्ति के ऐसे विचारों से बने जो कि लाखों लोगों को प्रभावित करें या करने लगें तो व्यक्ति की छवि भी उसी अनुपात... Continue Reading →
विवश श्वेत वस्त्रधारी अशरीरी अंतर्मन वापिस नरगिस के शरीर में प्रवेश कर जाता है। लता मंगेशकर ने अपनी गायिकी से इस गीत में उपस्थित दुख भरे भावों को गहरायी प्रदान की है। चाहे वह आवारा का ड्रीम सीक्वेंस हो या... Continue Reading →
यह गीत हृषिकेष मुखर्जी की फिल्म फिर कब मिलोगी (1974) का है। इसे लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी ने और संगीतबद्ध किया था आर.डी.बर्मन/पंचम ने। फिल्म में यह यह गीत दो बार आता है। पहली बार यह एकल गीत के रुप... Continue Reading →
Recent Comments