The vanishingकिसी व्यक्ति के करीबी प्रियजन की अनायास उत्पन्न हो गयी अनुपस्थिति उस व्यक्ति के जीवन में जानलेवा स्थितियाँ उत्पन्न कर देती है। बाल्मीकि की रामायण में ही उदाहरण देखें तो राम और लक्ष्मण की अनुपस्थिति में रावण सीता का बलात हरण कर लेता है और राम को पता नहीं है सीता का क्या हुआ, वह कैसे गायब हो गयी। वन-वन सीता को ढ़ूंढ़ते फिरते राम का विलाप शुरु में ज्यादा जानलेवा है। जटायु से मिलने से पहले उन्हे यह भी पता नहीं है कि सीता के साथ क्या हुआ और जटायु से उन्हे इतना पता चल जाता है कि रावण सीता को हर ले गया है। अब उनके पास एक ठोस सूचना है कि सीता का हरण हो चुका है। उनके सामने एक लक्ष्य है रावण की नगरी लंका का पता लगा कर वहाँ पहुँचना।

पर ऐसे भी लोग हैं जगत में जिन्हे यह तक नहीं पता चल पाता कि उनके प्रियजन के साथ असल में हुआ क्या। उनका जीवन अभिशप्त हो जाता है।

ढ़ेरों ऐसे थ्रिलर्स बने हैं जहाँ किसी व्यक्ति का कोई प्रियजन उसकी अनुपस्थिति में गायब हो गया है और अब उस व्यक्ति को अपने जीवन का लक्ष्य अपने करीबी को खोजने में नज़र आता है। उस व्यक्ति को ऐसा जानना नितांत आवश्यक हो जाता है कि उसके करीबी को क्या हुआ? वह कैसे गायब हुआ और उसके साथ क्या बीती? क्या वह अभी तक जीवित है या वह अब जीवित नहीं है?

प्रियजन की अनुपस्थिति पीछे रह गये व्यक्त्ति के जीवन में नर्कतुल्य परिस्थितियाँ लेकर आती है। न उससे ढ़ंग से जीते ही बनता है और न ही वह मर ही सकता है यह जाने बिना कि उसके प्रियजन के साथ क्या हुआ था।

और अगर दो व्यक्ति (प्रेमी-प्रेमिका या पति-पत्नी) साथ साथ ही कहीं जा रहे हों और रास्ते में किसी पड़ाव पर मिनटों में ही महिला गायब हो जाये तो पीछे छूट गये पुरुष की मनोस्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है। उसकी तड़पन के बारे में महसूस किया जा सकता है। बस अभी दस मिनट पहले तक वे दोनों साथ साथ थे। लड़ रहे थे, तर्क कर रहे थे, अपने जीवन के बारे में बातें कर रहे थे और अब प्रेमिका एक ऐसी जगह से गायब हो गयी है जहाँ बहुत सारे लोग मौजूद हैं।
क्या उसे कोई उठा कर ले गया?
क्या वह खुद ही उसे छोड़ कर चली गयी?
क्या उसके साथ कोई अपराध हो गया?
आखिर कैसे कोई वयस्क व्यक्ति ऐसे दस मिनट में एक भीड़ वाली जगह से गायब हो सकता है?

Tim Krabbé के लघु-उपन्यास The Golden Egg पर Dutch फिल्म निर्देशक George Sluizer ने 1988 में French और Dutch भाषाओं में The Vanishing नामक फिल्म बनायी। बाद में उन्होने 1993 में इसी फिल्म को अंग्रेजी में भी बनाया।

प्रेमिका के गायब हो जाने के बाद प्रेमी एक अस्त-व्यस्त जीवन जीता है। दूसरी महिला उसके जीवन में आती है पर वह इस बात से अपने जीवन को उबार नहीं पाता कि उसकी पूर्व प्रेमिका को क्या हुआ? उसके बीते जीवन की दुर्घटना उसके वर्तमान जीवन को दूषित कर रही है और नतीजतन उसकी वर्तमान प्रेमिका उसे छोड़ जाती है।

प्रेमी टीवी पर, अखबारों में अपील करता है उस अंजान व्यक्ति के नाम कि अगर किसी ने उसकी प्रेमिका का अपहरण किया है तो उसे बता दे और वह उसे कुछ नहीं कहेगा। तीन साल उसे खोजते खोजते हो जाते हैं। जिस स्थान से उसकी प्रेमिका गायब हुयी थी वहाँ खींचे गये एक फोटो में उसे अपनी प्रेमिका की धूँधली सी छवि दिखायी देती है कुछ लोगों के समूह के आसपास। पर उसे किसी से कुछ सहायता नहीं मिल पाती।

जीवन ऐसे ही गुजर रहा है कि सहसा एक दिन उसे किसी व्यक्ति का संदेश मिलता है कि वह उसकी प्रेमिका के बारे में जानता है। प्रेमी को कई बार कभी कहीं कभी कहीं बुलाया जाता है पर कोई व्यक्ति उससे मिलने नहीं आता।

प्रेमी के अंदर दुख, कुंठा, निराशा और गुस्से जैसे ऋणात्मक भावों ने घर किया हुआ है और ऐसे में जब अंततः वह आदमी उसे मिलता है जो कहता है कि वह जानता है कि उसकी प्रेमिका के साथ क्या हुआ तो उसके अंदर के सारे ऋणात्मक भाव लावा बनकर हिंसा के रुप में फूट पड़ते हैं।

पर ऐसी सब गणनायें करके ही अजनबी सामने आया है। वह उसे स्पष्ट कर देता है कि उसकी मौत का मतलब होगा कि प्रेमी को जीवन भर पता नहीं चल पायेगा कि उसकी प्रेमिका के साथ क्या हुआ।

प्रेमी को अपनी गलती का अहसास होता है। प्रेमी को अजनबी की हर शर्त माननी पड़ती है।

अजनबी प्रेमी के सामने स्पष्ट कर देता है कि वह शब्दों में उसे नहीं बतायेगा कि उसकी प्रेमिका के साथ क्या हुआ बल्कि वह उसे वहीं ले जायेगा जहाँ वह उसकी प्रेमिका को ले गया था और प्रेमी अपनी आँखों से सब देख लेगा और प्रेमिका के बारे में जानने का एक ही तरीका है कि वह भी उन्ही तमाम स्थितियों से गुजरे जिनसे उसकी प्रेमिका उस समय गुजरी थी।

अजनबी उसे अपने बारे में बहुत कुछ बताता है कि कैसे वह प्रयोग करना चाहता था कि वह अपने द्वारा निकृष्टतम समझे जाना वाला कृत्य कर सकता है या नहीं।

अजनबी प्रेमी के सामने नशीली कॉफी रख देता है कि उसे यह कॉफी पीनी पड़ेगा अगर उसे अपनी प्रेमिका के पास जाना है तो।

प्रेमी को अजनबी पर भरोसा नहीं है पर उसके सामने और कोई चारा भी नहीं है। अगर उसे प्रेमिका के बारे में जानना है तो उसे अजनबी की बात माननी ही पड़ेगी।

फिल्म का अंत दर्शकों के लिये एक बहुत बड़ा शॉक लेकर आता है। ऐसे झटके कम ही फिल्मों में लगते हैं।

Quentin Tarantino की Kill Bill का एक बहुत प्रभावी और प्रसिद्ध दृष्य इसी फिल्म से प्रेरित है।

The Vanishing में प्रेमी- Rex Hofman (Gene Bervoets) और प्रेमिका – Saskia Wagter (Johanna ter Steege) के चरित्रों के बहुत बाद में अजनबी – Raymond Lemorne (Bernard-Pierre Donnadieu) का प्रवेश होता है। पर घर-परिवार वाले कैमिस्ट्री टीचर के रुप में एक सामान्य व्यक्ति के रुप में जीवन जीते हुये भी उसके मस्तिष्क के अंधेरे को्ने जब उसे जघन्य अपराध करने की ओर ढ़केलते हैं तो वह फिल्म को एक नया माहौल दे देता है और जो फिल्म पहले एक प्रेमी के दुख और कुंठा से भरी हुयी फिल्म थी वह अब मानव-मनोविज्ञान को खंगालती हुयी फिल्म बन जाती है।

बेहद शांत और आत्मविश्वासी व्यक्ति-Raymond Lemorne के रुप में Bernard-Pierre Donnadieu एक बुरे चरित्र को बेहद सशक्त्त रुप से निभाते हैं।

विषय, फिल्मांकन और अभिनय के स्तर पर The Vanishing एक दर्शनीय और रोचक थ्रिलर है।

 

…[राकेश]

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