...[राकेश]
...[राकेश]
सीबीआई निदेशक अपने कनिष्ठ अधिकारी से कहता है - ‘अश्विन, तुमने इंसाफ की मूर्ति देखा है, उसके हाथ में तराजू है, आँखों पे पट्टी, अक्सर लोग देखना चूक जाते हैं कि उस मूर्ति के हाथ में एक तलवार भी है,... Continue Reading →
फिल्म ‘कथा’ केवल खरगोश और कछुए की कहानी का मानवीय दृश्यात्मक रूपांतरण नहीं है| ‘कथा’ के मूल में एक कहावत है – हर चमकती चीज सोना नहीं होती| जो अच्छा दिखाई दे रहा हो, जरूरी नहीं वह वास्तव में अच्छा... Continue Reading →
फिल्म बड़ी कुशलता से वर्तमान युग की समस्या- पानी की कमी, को जादुई, परीकथा, दंतकथा और सुपरमैन जैसी कथाओं के अंदाज देकर रोचक अंदाज में दर्शक के सम्मुख प्रस्तुत करती है| यदि भगीरथ की कथा को छोड़ दें, जिसने कथित... Continue Reading →
जीवन हमेशा ही पलक झपकते ही अपना रुख बदल लेता है| बस एक क्षण का समय ही पर्याप्त होता है जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के घटित होने के लिए| आसानी से चल रहा जीवन एक तीव्र मोड़ ले... Continue Reading →
अपने ‘मैं’ को खोकर जिसे पाते वह सौगात ‘प्रेम’ की! प्रेम में पहले दूसरा स्वयं से महत्वपूर्ण हो जाता है फिर दोनों के ‘मैं’ कुछ समय के लिए एक हो जाते हैं और एक समय आता है जब व्यक्ति को... Continue Reading →
...[राकेश] इच्छुक लोग फिल्म को यहाँ देख सकते हैं https://cinemanthan.com/2014/05/30/kahaani2012 https://cinemanthan.com/2015/05/12/piku2015
जिसने ‘दृश्यम’ फिल्म का मूल मलयाली संस्करण (मोहन लाल अभिनीत) और कमल हसन अभिनीत तमिल संस्करण नहीं देखे हैं उनके लिए फिल्म का अजय देवग्न अभिनीत हिंदी संस्करण एक अच्छे थ्रिलर देखने का आनंद प्रस्तुत करता है और मूल मलयाली... Continue Reading →
‘ ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©
Ugly का अंत और कुछ अन्य हिस्से इस भयानक रूप से वास्तविक प्रतीत होते हैं कि फिल्म दर्शक को डराती है और इस कदर डराती है कि दर्शक पहले तो हजार बार सोचेगा अपने छोटे बच्चे को कार में छोड़कर... Continue Reading →
...[राकेश]
भारत- पाकिस्तान के बीच तनाव का आलम ऐसा है कि बिना आग भी धुआँ उठ सकता है और बिना मुददे के भी दोनों देश लड़ सकते हैं, इनकी सेनाएं जंगे-मैदान में दो –दो हाथ न करें तो क्रिकेट के मैदान... Continue Reading →
“मैडम जी, शहर में जहां बड़े बड़े मॉल खत्म हो जाते हैं न बस डेमोक्रेसी भी वहीं समाप्त हो जाती है”| एक पुलिस इन्स्पेक्टर फिल्म की नायिका मीरा (Anushka Sharma) से कहता है और उसे समझाता है कि पुलिस वाले... Continue Reading →
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