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Cinema, Theatre, Music & Literature

Tere Ghar Ke Samne (1963) : सर्दियों की नर्म धूप

  ...[राकेश] © https://cinemanthan.com/2013/09/18/tukahan/

Nayantara’s Necklace (2015) : अपने वर्तमान से ऊबे, थके और परेशान हुए लोग

दो स्त्रियों एवं एक पुरुष चरित्र के माध्यम से एक स्त्री की कहानी दिखाने वाली तकरीबन बीस मिनट की अवधि की यह लघु फिल्म, लघु फिल्मों को बनाए जाने की महत्ता को स्थापित करती है और यह भी स्थापित करती... Continue Reading →

Tamasha (2015) : बचपन ओ’ मोहब्बत को दिल से न जुदा करना

बचपन, बचपन से मोहब्बत और बचपन की मोहब्बतें तीनों का इंसान के जीवन में बहुत बड़ा शायद सबसे बड़ा स्थान है| बचपन की मोहब्बतों में आवश्यक नहीं कि यह किसी इंसान से ही मोहब्बत का मामला हो, यह किसी विधा... Continue Reading →

Bawarchi (1972): दिल चोर बावर्ची!

...[राकेश]

Talvar (2015) : पुलिस की अक्षम और आपत्तिजनक तहकीकात पर श्वेत पत्र

कुछ साल पहले खोजी पत्रिका ‘तहलका’ की पत्रकार शोमा चौधरी ने आरुषि हत्याकांड में अदालत का निर्णय आने पर अपनी तरफ से खोज की थी और अपने लेख (विस्तृत लेख यहाँ पढ़ा जा सकता है और शोमा दवारा खुलासा किये... Continue Reading →

Bombai ka Babu(1960) : सुचित्रा सेन के लिए देव आनंद सगा भाई है, पर देव सुचित्रा में प्रेमिका खोजता है

...[राकेश]

Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल

...[राकेश]

Katha (1983) : सीधा-सच्चा, आदर्शवादी और अंतर्मुखी पुरुष बनाम जालसाज, झांसेबाज छलिया !

© ...[राकेश]  

Absurdistan(2008) : No Water No Sex

© ...[राकेश]  

Pratidwandi(1970) : वास्तविक समस्याएं जीवन में समझौते करने का दबाव बनाती हैं!

जीवन हमेशा ही पलक झपकते ही अपना रुख बदल लेता है| बस एक क्षण का समय ही पर्याप्त होता है जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के घटित होने के लिए| आसानी से चल रहा जीवन एक तीव्र मोड़ ले... Continue Reading →

Mammo (1994) : भारत के बंटवारे और ‘दो राष्ट्र’ के जिद्दी प्रयोग में दबी कुचली ज़िंदगी

...[राकेश]

Kalyug (1981) : महाभारत के संघर्ष आधुनिक परिवेश में

...[राकेश]

Manjhi : The Mountain Man (2015) – जुनूनी आशिक की दास्तान है प्यारे

अपने ‘मैं’ को खोकर जिसे पाते वह सौगात ‘प्रेम’ की! प्रेम में पहले दूसरा स्वयं से महत्वपूर्ण हो जाता है फिर दोनों के ‘मैं’ कुछ समय के लिए एक हो जाते हैं और एक समय आता है जब व्यक्ति को... Continue Reading →

The Pursuit of Happyness (2006) : हाशिए पर पड़े जीवन का निराशा के गर्त से उठकर उदय होना

©...[राकेश]

Ahalya (2015) : वासना का खतरनाक प्रलोभन

 ...[राकेश] इच्छुक लोग फिल्म को यहाँ देख सकते हैं https://cinemanthan.com/2014/05/30/kahaani2012 https://cinemanthan.com/2015/05/12/piku2015

हिंदी सिनेमा का अनूठा संन्यासी सुपर अभिनेता स्टार

सन 1984 के किसी दिवस की बात है| एक शिष्य अपने गुरु दवारा बसाए गये शहर में उनके आवास के बाहर रोते हुए गुरु की निजी सचिव से कह रहा है,” भगवान, ने मुझे किस मुसीबत में डाल दिया| मुझे... Continue Reading →

Drishyam(2015) : लुका छिपी – अहंकारी पुलिस अधिकारी बनाम सिनेमा भक्त चौथी फेल आम आदमी

जिसने ‘दृश्यम’ फिल्म का मूल मलयाली संस्करण (मोहन लाल अभिनीत) और कमल हसन अभिनीत तमिल संस्करण नहीं देखे हैं उनके लिए फिल्म का अजय देवग्न अभिनीत हिंदी संस्करण एक अच्छे थ्रिलर देखने का आनंद प्रस्तुत करता है और मूल मलयाली... Continue Reading →

Masaan (2015) : खिलने से पहले फूलों को खिज़ा खा गई

‘  ऐसे जीवन भी हैं जो जिए ही नहीं जिनको जीने से पहले ही मौत आ गई फूल ऐसे भी हैं जो खिले ही नहीं जिनको खिलने से पहले खिज़ा खा गई ...[राकेश] ©

हमने देखी हैं उन आँखों की महकती खुशबू (Khamoshi 1969) : अनूठे मुखड़े से सजा प्रेमगीत ग्रंथ

...[राकेश] https://youtu.be/doPtBhDTpj0?si=st9Jv6ShXnVzrATS https://cinemanthan.com/2013/10/04/khamoshi1969 ©

Ugly (2014) : असंवेदनशीलता और खुदगर्जी से सड़ते रिश्तों की बजबजाती गंदगी में मरता बचपन

 ...[राकेश] Bombay Velvet https://cinemanthan.com/2015/05/19/bombayvelvet2015/

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