बड़े बाँध बनने से, माइनिंग के कारण, बहुत बड़े उद्योग लगने के कारण हुये स्थानीय लोगों के विस्थापन को नेहरू युग में देश में अन्यत्र रह रहे लोग महसूस भी न कर पाते होंगे| तब देश के नेता ने एक... Continue Reading →
थप्पड़ : (बस इतनी सी बात), निर्देशक अनुभव सिन्हा की सामाजिक मुद्दों पर टीका टिप्पणी वाली श्रंखला की अगली कड़ी है जिसमें व्यावसायिक करियर के अपने स्वप्न पर अपने ऑफिस द्वारा नियंत्रण करने से बेहद नाराज़ युवक अपने ही घर... Continue Reading →
रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया मैंने दिल तुझको दिया, मैंने दिल तुझको दिया ओ रमैय्या वस्तावैया, रमैय्या वस्तावैया नैनों में थी प्यार की रौशनी तेरी आँखों में ये दुनियादारी न थी तू और था, तेरा दिल और था तेरे मन में... Continue Reading →
अगर कभी गुलज़ार के किसी पुराने गीत को उन्हे अपने स्वर देने पड़ें तो यह गीत सर्वश्रेष्ठ अवसर उत्पन्न करता है उनके लिए| ...[राकेश] https://youtu.be/BfeJ-tuUoIc?si=GAonq-Xo3g4RN6PO ©
जीवन का खेल बड़ी तेजी से चलता है, जीवन के खिलौने एक के बाद एक पीछे गिरते जाते हैं, और भुला दिए जाते हैं| जीवन को जीने या जीवन को सुख सुविधा से भरपूर तरीके से जीने के साधन जुटाने... Continue Reading →
दो स्त्रियों एवं एक पुरुष चरित्र के माध्यम से एक स्त्री की कहानी दिखाने वाली तकरीबन बीस मिनट की अवधि की यह लघु फिल्म, लघु फिल्मों को बनाए जाने की महत्ता को स्थापित करती है और यह भी स्थापित करती... Continue Reading →
बचपन, बचपन से मोहब्बत और बचपन की मोहब्बतें तीनों का इंसान के जीवन में बहुत बड़ा शायद सबसे बड़ा स्थान है| बचपन की मोहब्बतों में आवश्यक नहीं कि यह किसी इंसान से ही मोहब्बत का मामला हो, यह किसी विधा... Continue Reading →
...[राकेश]
कुछ साल पहले खोजी पत्रिका ‘तहलका’ की पत्रकार शोमा चौधरी ने आरुषि हत्याकांड में अदालत का निर्णय आने पर अपनी तरफ से खोज की थी और अपने लेख (विस्तृत लेख यहाँ पढ़ा जा सकता है और शोमा दवारा खुलासा किये... Continue Reading →
जीवन हमेशा ही पलक झपकते ही अपना रुख बदल लेता है| बस एक क्षण का समय ही पर्याप्त होता है जीवन की दिशा बदलने वाली घटना के घटित होने के लिए| आसानी से चल रहा जीवन एक तीव्र मोड़ ले... Continue Reading →
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