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Cinema, Theatre, Music, Literature & Life

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Indian Cinema

Maamla Legal Hai(2024) : हंसने की अदालत जारी है

....[राकेश]

हजार राहें जो मुड़ के देखीं : गुलज़ार खय्याम किशोर लता

https://youtu.be/t1O9anHPo_Y?si=Ht9OsaNyZPxw7Nd0

All India Rank (2024) : याद न जाये बीते दिनों की

...[राकेश]

वरुण (ग्रोवर)  : All India Rank से पहले का फ्लैश बैक

...[राकेश]

हुड हुड दबंग (लंतरानी) : ट्रैजिकॉमेडी का स्तरीय रूप

...[राकेश]  

Animal(2023) : Alpha Male & Swanand Kirkire

हिंदी फिल्मों में ही ऐसे उदाहरण मिल जायेंगे जहां किसी चरित्र का चित्रण समाज के लिए घातक लगेगा लेकिन फ़िल्में आती हैं चली जाती हैं, समाज अपनी मंथर गति से बदलाव देख,समझ, स्वीकार करके बढ़ता रहता है| आखिरकार तो सिनेमा... Continue Reading →

Animal (2023) : जूता चाट दृश्य ::  Javed Akhtar

https://youtu.be/p071YCW3h8M?si=Z7CoEsiKhne_Yc74 https://youtu.be/TMKnnykdZXc?si=3rx3jjVD_9m4OcLH   https://youtu.be/YBOo4Vy0IKY?si=cfNUizmTeP6maBpd                        ...[राकेश]

Shart (1986) : I Love You Kiran…

फ़िल्म- शर्त, रिस्टोर होकर ओटीटी पर पुनः प्रदर्शित हो तो इसे आज के समय में सही दर्शक और प्रशंसक मिल जायेंगे|                ...[राकेश]    

Yeh Woh Manzil To Nahin (1987) : अपराध बोध से भयभीत जीवन का पश्चाताप

                    ...[राकेश] पुनश्च : हाल में ऐसी ख़बरें थीं कि सुधीर मिश्रा ने कहीं कहा है कि वे इस फ़िल्म - ये वो मंजिल तो नहीं, को दुबारा बनायेंगे| ऐसा करने से बेहतर हो कि वे इस फ़िल्म को ओटीटी... Continue Reading →

समान्तर (2009) : ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है!

  ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है... जीवन की आपाधापी में कब वक्त मिलाकुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूं,जो किया, कहा, माना उसमें भला बुरा क्या। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैनें देखा,मैं खड़ा... Continue Reading →

Pavan Jha : यहाँ पे रहते हैं अजातशत्रु

तुममें कहीं "कुछ" है कि तुम्हें उगता सूरज, मेमने, गिलहरियाँ, कभी-कभी का मौसम, जंगली फूल-पत्तियां , टहनियां - भली लगती हैं...  (रघुवीर सहाय) इस "कुछ" को परिभाषित करना दुष्कर कार्य है| हरेक के लिए है| हमेशा रहा है| इंटरनेट के अस्तित्व में... Continue Reading →

ओम पुरी की अभिनय की पाठशाला

रात के 8 बजे थे, सर्दी अभी शुरू ही हुई थी, मैं (आशुतोष राणा)  ओम पुरी साहब के साथ पुष्कर तीर्थ के ब्रह्म कुंड पर बैठा था। हम हिंदी फ़िल्म Dirty Politics की शूटिंग कर रहे थे। बात ही बात... Continue Reading →

तुम बिन जाऊँ कहाँ (प्यार का मौसम 1969) : पंचम के पांच जादू

https://youtu.be/YQNb89xnKvQ?si=_hJcif396ONsLOzu https://youtu.be/62w7UB3h1xU?si=XWXMUsu8zu4-Cc8v https://youtu.be/WGH36wL6lHM?si=dK5CDvb2Rj9PBdvF https://dai.ly/x806f7z https://youtu.be/PZwoyWODUtE?si=9YEH7AVr_h3ACvoN                 ...[राकेश]      

Jaane Jaan (2023): Stratagem of a silent lover!

                      ...[राकेश]  

12th Fail (2023) : सफलता का दावेदार

    ...[राकेश]

Three of Us (2022): त्रिकाल की पहेलियाँ

इस फ़िल्म को हृषिकेश मुकर्जी की आनंद (Anand (1971) : जीने का अंदाज अंकुरित कर जाने वाला जिंदादिल) पारिवारिक मित्र के घर बैठक का दृश्य शैफाली शाह के बेहतरीन अभिनय वाली लघु फ़िल्म Juice (Juice (2017) : क्वथनांक से बस एक डिग्री कम)... Continue Reading →

तुम कहाँ हो देव… दिलीप कुमार

देव आनंद को दिलीप कुमार की श्रद्धांजलि (10.12.2011) साभार सन्दर्भ : - 10 दिसंबर 2011 को द हिन्दू में अंगरेजी में छपी श्रद्धांजलि का हिंदी अनुवाद

The Archies 2023 : सत्तरह बरस की बाली उम्र का संगीत समारोह

...[राकेश]    

Animal(2023) : रनबीर से पहले दादा राज कपूर,पिता ऋषि कपूर, उनकी नायिकाएं और हिंसा

https://www.youtube.com/embed/DPoE8MS097I?si=LD0ZQzYHdGGpsLTD ...[राकेश]

अलका : भूलभुलैया में खो जाने वाली अभिनेत्री के अद्भुत गीत

https://www.youtube.com/embed/_2I6inFlQR4?si=3O4Pxubn65X5FXta https://www.youtube.com/embed/mk2bciQw-MM?si=ZTjuV-O-zj3O2IRV https://www.youtube.com/embed/M-_S4GBf-Go?si=sUC3uCYNnH39Y7fK https://www.youtube.com/embed/kv87jmRp7zo?si=flCZ2xiTatSfQCpH https://www.youtube.com/embed/QOTTbsHI2-Q?si=GQkG1Xsik63AzqDW ...[राकेश] [ तुम महकती जवां चाँदनी हो (प्यासे दिल 1974) : मुकेश के सिरमौर रत्नों में से एक ]

The Great Indian Family(2023): हिन्दू-मुसलमान और इंसान !

https://www.youtube.com/watch?v=6PYsyl4xBDA ...[राकेश] धर्म (Dharm(2007) : दिल न मंदिर, न मस्जिद, न गिरजा, न गुरुद्वारा),

Field Marshal Sam Manekshaw : Pippa Vs Sam Bahadur

”आत्मा की शान्ति में नफा नुस्कान नहीं देखा जाता” (नंदू उर्फ़ नन्द किशोर खत्री, द ब्लू अम्ब्रेला)      https://www.youtube.com/watch?v=6xJptj7AVSA https://www.youtube.com/watch?v=qRmPmm7QeIE निम्न वीडियो में जनरल सैम मानेक शॉ को सैनिकों और पाक युद्धबंदी सैनिकों संग देखा जा सकता है| उनकी... Continue Reading →

Ghoomer (2023) :  अभिषेक को अमिताभ बच्चन के अभिनय के साये से बाहर निकलना ही होगा

                      ...[राकेश]      

रोते रोते गुज़र गई रात रे [Buzdil (1951)]…

चेतावनी : कमजोर ह्रदय के श्रोता, विशेषकर प्रेम में वियोग झेल रहे व्यक्ति, और ऐसे व्यक्ति जिन्होंने कभी भी जीवन में सच में प्रेम को जीवन में जिया हो, इस गीत को रात की तन्हाइयों में लगातार न सुनें| उर्दू... Continue Reading →

जॉन एलिया : सिनेमा के परदे पर कब?

  [ सालहा साल और एक लम्हाकोई भी तो ना इनमे बल आया खुद ही एक दर पर मैंने दस्तक दीखुद ही लड़का सा मैं निकल आया उर्दू शायरी के गुलशन में हज़ारों फूलों ने अहसास की अमिट खुशबू बिखेरी... Continue Reading →

दूर कोई गाये (बैजू बावरा 1952) : राधा बिन गूंगी कृष्ण की मुरलिया

दूर कोई गाए धुन ये सुनाए तेरे बिन छलिया रे बाजे न मुरलिया मन के अंदर हो प्यार की अग्नि नैना खोये-खोये के हाय रामा नैन खोये-खोये अभी से है ये हाल तो आगे राम जाने क्या होए नींद नहीं... Continue Reading →

जय वीरू ढ़ाबा, रामगढ़

...[राकेश]

कृष्ण लीला (1)

राधिका : सुनंदा मौसी, प्लीज अपनी शादी से पहले मेरे कॉलेज में कृष्ण नाटक करवा दो न| मैंने अपनी ड्रामा टीचर से कह दिया है कि वार्षिक उत्सव के लिए नाटक मैंने तैयार कर लिया है और बस अब अभ्यास... Continue Reading →

देव आनंद : अमर प्रेमी !

                           ...[राकेश]

देव आनंद : दिल की उमंगें हैं जवां

....[राकेश]

टोटका (3) (पोस्टमार्टम)

अगले दिन सुभाष थाने में जवाहर के कक्ष में पहुँचता है| सुभाष – सर, पोस्ट मार्टम रिपोर्ट आ गयी है, एंटीमार्टम रिपोर्ट तो जीरो है| रिपोर्ट अभी तो यही बता ही रही है कि मौत दिल के बड़े भारी दौरे... Continue Reading →

Majboor (1974) : मजबूर ये हालात इधर भी हैं उधर भी

  ...[राकेश]

Dev Bhoomi [Land of the Gods] 2016 : पर्वतों के डेरे पर वापसी

  ब्रितानी साम्राज्य से स्वतंत्रता पश्चात दशकों तक मनी ऑर्डर और पेंशन जिसकी आर्थिक रीढ़ रही हो, जहाँ नारी दैनिक जीवनयापन की धुरी बनी रही हो, और जहाँ पक्की सड़कें बन जाने के कारण, कहीं बाज़ार आदि जाने में लगने... Continue Reading →

Vadh (2022) : कर्मफल के चक्रव्यूह में अपराधी कौन?

फ़िल्म "वध" "दृश्यम" (भाग 1 एवं 2) जैसी कसावट ली हुयी सस्पेंस थ्रिलर नहीं है, यह चरित्रों के बीच हाई वोल्टेज ड्रामा रचने के कारण दर्शक को बाँध सकने वाली फ़िल्म भी नहीं है| "वध" में निम्नमध्यवर्गीय जीवन की पारिवारिक... Continue Reading →

Chup (2022) : बात कुछ बिगड़ ही गई

  कहते हैं हिटलर बचपन में एक चित्रकार बनना चाहता था लेकिन आर्ट स्कूल की प्रवेश परीक्षा में वह उत्तीर्ण न हो पाया और आर्ट स्कूल ने उसे अपने यहाँ प्रवेश देने से इनकार कर दिया| हिटलर के अन्दर एक... Continue Reading →

कसमें वादे प्यार वफ़ा सब [उपकार (1967)] : किशोर कुमार की नासमझी, मन्ना डे की किस्मत  

  ...[राकेश]

एंग्री ओल्ड मैन “अशोक कुमार” [Khatta Meetha (1978)] : अभिनय शानदार – 1

बासु चटर्जी निर्देशित फ़िल्म - ‘खट्टा मीठा’ को एक पारिवारिक हास्य फ़िल्म के रूप में ही देखा, समझा और याद किया जाता है| पारसी किरदारों पर बनी, अच्छे संगीत और स्वस्थ हास्य से भरपूर फ़िल्म| महान अभिनेता- अशोक कुमार, जिन्हें... Continue Reading →

चुनरी संभाल गोरी (बहारों के सपने 1967) : मन्ना डे (उत्सवधर्मिता), लता (भावों की बरसात) संग पंचम की संगीत मधुशाला

पंचम संगीत के विशाल सागर में उठी वह तरंग रही है जो आज भी संगीत सागर में न केवल विद्यमान है बल्कि पुरजोर तरीके से संगीत सागर में हिलोरे मार रही है| सागर में उठी तरंगों के कारण अन्दर से... Continue Reading →

Mirza Ghalib (1988-89): पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है… (अध्याय 5)

“दुःख तोड़ता भी है, पर जब नहीं तोड़ता या तोड़ पाता, तब व्यक्ति को मुक्त करता है” (अज्ञेय के विलक्षण उपन्यास “नदी के द्वीप” की दो में से एक नायिका का कथन) दुःख एक नितांत निजी मसला है मनुष्य के... Continue Reading →

रजनीगंधा फूल तुम्हारे  (रजनीगंधा – 1974) : जग ने देखी लता मंगेशकर की महकती गायिकी

https://www.youtube.com/watch?v=8PgqS4tcS54 ...[राकेश]

रहें न रहें हम, महका करेंगे (लता मंगेशकर) : ममता (1966)

मजरुह ने शब्दों का विन्यास इस तरह से सजाया है कि गाने और विराम में एक ज़रा सी चूक लय बिगाड़ सकती थी लेकिन लता ने अन्तरों की लम्बी पंक्तियों को इस खूबसूरती से गाया है, एकदम उचित जगह पर... Continue Reading →

लता मंगेशकर : भारत का गौरव ही नहीं, स्वाभिमान भी

(https://cinemanthan.com/2013/10/15/donainonmeinansoo/)

इरफ़ानियत : अभिनय और इंसानियत के मिश्रण से निकला X- फैक्टर

आम दर्शक किसी अभिनेता को कैसे जाने? अभिनेता नाटक करता हो तो उसके द्वारा नाटक में निभाए गए चरित्रों (चुनाव) के द्वारा या उन भूमिकाओं में उसके अभिनय की गुणवत्ता के द्वारा? अभिनेता सिनेमा के संसार में कार्य करता हो... Continue Reading →

समय साक्षी है (हिमांशु जोशी) : बहुत कठिन है डगर राजनीति की!

एक अच्छी कृति की पहचान यही होती है कि वह समय समय पर जीवित होता रहती है और भिन्न-भिन्न काल की पीढ़ियों को अपने से जोड़ती रहती है।   अच्छे सिनेमा का गुज़ारा बिना अच्छे कथ्य के नहीं होता| अब... Continue Reading →

Shershah (2021) : कैप्टेन विक्रम बत्रा (पीवीसी) की शहादत

कारगिल का युद्ध एक ऐसा कड़वा इतिहास है जो भारतीय जनमानस से आसानी से हट नहीं पायेगा| जिसने भी उस दौर का मंजर देखा है, उसे कश्मीर की तरफ कूच करती बोफोर्स तोपें और सेना की टुकडियों के वाहनों की... Continue Reading →

राग-विराग (श्रीलाल शुक्ल) : छोटा करके देखिये जीवन का विस्तार

…[राकेश]

तुम्हारे लिए (हिमांशु जोशी) : गहन दुख में पगी एक प्रेमकथा

हिन्दी सिनेमा ने शरतचंद्र चटर्जी, टैगोर, बिमल मित्र, समरेश बसु, आदि बंगलाभाषी साहित्यकारों की रचनाओं पर आधारित फ़िल्में बनाई हैं और इन पुस्तकों के कारण ठोस विषय सामग्री मिल जाने के कारण इन सभी फिल्मों का स्तर सराहनीय रहा है|... Continue Reading →

रिम-झिम गिरे सावन (Manzil 1979) : आई बरसात तो लता मंगेशकर ने समां बाँध दिया

https://www.youtube.com/watch?v=IRPCMEJpQaw&list=RDGMEMPipJmhsMq3GHGrfqf4WIqAVMIRPCMEJpQaw&start_radio=1 ...[राकेश]

रिम झिम गिरे सावन (Manzil 1979) : महागायक “किशोर कुमार” का सावन वर्णन

https://www.youtube.com/watch?v=OIsHPxP6bEo

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